जीवनदायिनी ऑक्सीजन हमें हरे-भरे पौधों से मिलती है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि केवल पेड़ पौधे लगाकर हमारी जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। पौधे लगाने के बाद इसकी देखरेख करना हमारी और भी अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। उनकी तुलना में जांजगीर-चांपा जिले में मात्र 7 प्रतिशत वन क्षेत्र है। इसको बढ़ाने के लिए हम सबको मिलकर सतत प्रयास करना होगा। वृक्षारोपण के माध्यम से फलदार, औषधि गुण वाले पौधे, छायादार वृक्षों को लगाने से प्रर्यावरण संतुलित होगा और भविष्य में यह आजीविका के स्रोत भी बनेंगे। उन्होंने अर्जुन वृक्ष की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस वृक्ष से कोसा उत्पादन की वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि अर्जुन वृक्ष के पत्ते, छाल में भीऔषधीय गुणों से भरपूर होते है। इस वर्ष राज्य में औषधीय गुणों वाले मुनगा सहित अन्य पौधें भी प्रथमिकता के साथ रोपे जा रहे हैं।
जैजैपुर विधायक ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा स्वास्थ्य पर्यावरण पर निर्भर करता है। हरे भरे वृक्षों से ही हम स्वस्थ रह सकते हैं। इसके माध्यम से आजीविका के भी रास्ते खुलेंगे। गौठान, तालाब के पार मे, सड़क किनारें पेड़ लगाना हमारी संस्कृति रही है।
मुख्य वन संरक्षक सोनी ने बताया कि बिलासपुर संभाग के सभी जिलों में कुल 45 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 50 लाख पौधे का निशुल्क वितरण किया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र को बढ़ाना है।
जिले में अब तक सात लाख पौधों का रोपण- कलेक्टर,
कलेक्टर ने कहा कि जिले में इस मानसून सत्र में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 7 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। कलेक्टर ने कहा कि आगामी वर्ष के लिए 50 लाख पौधों की नर्सरी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसकी कार्यवाही अक्टूबर माह से प्रारंभ हो जाएगी।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ,उपाध्यक्ष सारागांव नगर पंचायत की अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर, वन मंडल अधिकारी प्रेमलता यादव, सहित त्रि-स्तरीय पंचायत एवं नगरीय निकाय के जन प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
दीपक यादव के साथ हितेश मानिकपुरी रायपुर छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट ।





















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