"श्रावण शुक्ल द्वितीय पर आज पारंपरिक रूप से सिंजारा महोत्सव मनाया गया.
सी एन आइ न्यूज -पुरुषोत्तम जोशी । रायपुर- गणगौर से पहले महिलाओं ने पारंपरिक रूप से मनाया सिंजारा महोत्सव ।
गणगौर राजस्थान का सबसे बड़ा त्यौहार है, जिसे सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं धूमधाम से पूजती है,
सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए और कुंवारी कन्याएं श्रेष्ठ पति के लिए इसका व्रत रख पूजा करती हैं ।
सिंजारे के मौके पर घर-घर सिंजारे का उल्लास नजर आया. गणगौर से एक दिन पूर्व हुए सिंजारा पर 'ईसर ढूंढण चाली गणगौर' महोत्सव मनाया गया, राजस्थानी संस्कृति से ओतप्रोत इस संस्कृति को धूमधाम हर्षोल्लास के साथ सेलीब्रेट किया ।
ईसर-गौर, गणगौर की राजस्थानी लोकगीतों की मधुर स्वरलहरियों में महिलाओं ने नृत्य किया. इससे पहले हाथों पर मेहंदी रचाई और श्रृंगार किया
नवविवाहिताओं के ससुराल से सिंजारा आया, जिसमें आभूषण, श्रृंगार के सामान, साड़ी, मेहंदी और घेवर थे। 16 दिनों तक मनाया जाने वाला यह पर्व होली के दिन से प्रारंभ हो जाता है,और महिलाएं एवं बालिकाएं घर में मिट्टी के ईसर-पार्वती जी की पूजा करती हैं ।






















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