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Friday, April 9, 2021

हरे कृष्ण महताब का जीवनवृत्त समाज के लिये अनुकरणीय --पीएम मोदी

 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट


नई दिल्ली -- महताब ने आज़ादी की लड़ाई में अपना जीवन समर्पित किया , उन्होंने जेल की सजा काटी थी। लेकिन महत्वपूर्ण ये रहा कि आज़ादी की लड़ाई के साथ-साथ वो समाज के लिये भी लड़े। ये बात आज के जनप्रतिनिधियों को हैरत में डाल सकती है कि जिस पार्टी से वो मुख्यमंत्री बने थे , आपातकाल में उसी पार्टी का विरोध करते हुये वे जेल भी गये थे। यानि वे ऐसे विरले नेता थे जो देश की आज़ादी के लिये भी जेल गये और देश के लोकतंत्र को बचाने के लिये भी जेल गये थे।  हरे कृष्ण महताब ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने इतिहास बनाया भी, बनते देखा भी और उसे लिखा भी। वास्तव में ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व बहुत कम होते हैं। ऐसे महापुरुष खुद भी इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय होते हैं।

उक्त बातें आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओड़िशा के पूर्व मुख्यमंत्री हरे कृष्ण महताब द्वारा लिखित "ओड़िशा इतिहास" पुस्तक के हिंदी वर्जन का विमोचन करते हुये कही। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भर्तृहरि महताब सांसद (एलएस), कटक भी इस अवसर पर उपस्थित थे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास केवल अतीत का अध्याय ही नहीं होता, बल्कि भविष्य का आईना भी होता है। पीएम मोदी ने कहा कि ये किताब ऐसे साल में प्रकाशित हुई है जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इसी साल उस घटना को भी 100 साल पूरे हो रहे हैं, जब हरेकृष्ण महताब जी कॉलेज छोड़कर आजादी के आंदोलन से जुड़े। गांधी जी ने जब दांडी यात्रा की शुरुआत की थी तब हरे कृष्ण महताब जी ने इस यात्रा को ओडिशा में नेतृत्व किया था। पीएम मोदी ने हरे कृष्ण महताब की तारीफ करते हुये उनसे जुड़े किस्से भी साझा किये। पीएम ने कहा कि करीब डेढ़ वर्ष पहले हम सबने "उत्कल केसरी" हरे कृष्ण महताब की एक सौ बीसवीं जन्म जयंती मनायी थी  और आज हम उनकी प्रसिद्ध किताब "ओड़िशा इतिहास" के हिंदी संस्करण का लोकार्पण कर रहे हैं। ओड़िशा का व्यापक और विविधताओं से भरा इतिहास देश के लोगों तक पहुंचे , ये बहुत ही आवश्यक है। महताब ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में कई बड़े-बड़े फैसले लिये। सत्ता में रहकर भी वो अपने आप को पहले स्वतंत्रता सैनानी मानते थे और वो जीवन पर्यन्त स्वाधीनता सैनानी रहे। मोदी बोले, 'पाइक संग्राम, गंजाम आंदोलन और लारजा कोल्ह आंदोलन से लेकर सम्बलपुर संग्राम तक ओडिशा की धरती ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की ज्वाला को हमेशा नई ऊर्जा दी। कितने ही सेनानियों को अंग्रेजों ने जेलों में डाला, यातानायें दी लेकिन आजादी का जूनून कम नहीं हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि ओडिशा के हमारे आदिवासी समाज के योगदान को कौन भुला सकता है ? हमारे आदिवासियों ने अपने शौर्य और देशप्रेम से कभी भी विदेशी हुकूमत को चैन से बैठने नहीं दिया। ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन के महान आदिवासी नायक लक्ष्मण नायक को हमे जरूर याद करना चाहिये।  पीएम ने कहा कि ओडिशा के अतीत को आप खंगालें तो देखेंगे कि उसमें हमें ओडिशा के साथ साथ पूरे भारत की ऐतिहासिक सामर्थ्य के भी दर्शन होते हैं. इतिहास में लिखित ये सामर्थ्य वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ा हुआ है, भविष्य के लिए हमारा पथप्रदर्शन करता है.।

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