लांजी नगर परिषद में पदस्थ सहा. उपयंत्री रिश्वत लेते गिरफ्तार
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बालाघाट। बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया कहावत को चरितार्थ करते हुए नगर परिषद लांजी में लोक निर्माण शाखा प्रभारी व सहायक उपयंत्री को ठेकेदार द्वारा किए गए कार्यों की फाइल और बिल पास करने के नाम पर मांगी गई रिश्वत लेते हुए मंगलवार को जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।जानकारी अनुसार सहायक उपयंत्री निर्माण शाखा प्रभारी नगर परिषद लांजी में संजय प्रकाश पिता स्व. एसपी शर्मा 59 वर्ष द्वारा ठेकेदार अशोक चौधरी पिता स्व. दशरथ लाल चौधरी 31 वर्ष नर्मदा नगर वार्ड नंबर 32 बालाघाट निवासी से 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। जिसकी शिकायत अशोक चौधरी ने जबलपुर लोकायुक्त में की थी।
जानकारी अनुसार ठेकेदार अशोक चौधरी के द्वारा लांजी तहसील मुख्यालय के वार्ड नंबर दो में वाचनालय भवन का निर्माण छह लाख रुपये की लागत से किया गया था।इसमें ठेकेदार को मटेरियल के तीन लाख 97 हजार रुपये भुगतान किया गया था। लेकिन मजदूरों का पौने दो लाख रुपये भुगतान शेष था।इस राशि को निकलवाने और फाइल तैयार करने के लिए सहायक उपयंत्री ने 25 हजार रुपये की मांग की थी। जिससे चार से पांच माह से मजदूरों का भुगतान के लिए घुमाया जा रहा था।जिसमें पहले पांच हजार रुपये देने के बाद बिल भुगतान की कार्रवाई प्रारंभ होने की बात कही थी। लेकिन इसके बाद भी भ्रष्ट उपयंत्री काम नहीं कर रहा था, इसके लिए उसे 1500 रुपये और नकद दिए गए थे जो साढ़े छह हजार रुपये हो रहे थे। मंगलवार को 3500 रुपये दिए जाने के दौरान लोकायुक्त उप पुलिस अधीक्षक जेपी वर्मा के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम ने छापा मारकर उपयंत्री संजय प्रकाश शर्मा को रिश्वत लेते दोपहर करीब ढाई बजे नगर परिषद कार्यालय में धर दबोचा।जिसमें लोकायुक्त टीम द्वारा भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
हर कार्यालय में भ्रष्टाचार का बोलबाला
किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत के काम नही होता।अगर ठेकेदार रिश्वत नही देता तो उसकी फ़ाइल पास नही की जाती है,कुछ न कुछ कमी निकाल कर फ़ाइल को लटका दिया जाता है।मजबूर होकर रिश्वत रूपी डायन को रुपये के रूप में पेश किया जाता है तब जाकर संजय प्रकाश जैसे उपयंत्री खुश होकर डकार मारते हैं जिससे लोगो का काम बनता है।ऐसे धन पिपासु अधिकारियों व कर्मचारियों की सारी संपत्ति कुर्क कर सरकारी खजाने में जमा की जाय ताकि इनके जैसे रिश्वतखोरो के लिए सबक मिले जिससे दुबारा कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेने के बारे में सौ बार सोचे,तभी देश का असली विकास होगा।
इनका कहना है....
नगर परिषद लांजी में लोक निर्माण शाखा प्रभारी व सहायक उपयंत्री द्वारा एक ठेकेदार से किए गए कार्यों की फाइल और मजदूरों का बिल निकालने के लिए 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी।जिसमें दो बार में ठेकेदार साढ़े छह हजार रुपये की राशि दे चुका था। तीसरी बार 3500 रुपये देते हुए सहायक उपयंत्री को पकड़ा गया है।
जेपी वर्मा, उप पुलिस अधीक्षक, जबलपुर लाेकायुक्त।


















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