
मामला मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का ।
छुरिया-ताहिर खान:- नगर पंचायत छुरिया में मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत बने 100 दुकानों की आबंटन प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है । प्रभावितों एवं बेरोजगारों को छोड़कर पैसे वालों को रातो-रात दुकान की चाबी सौंप दी गई है । हद तो यह हो गई कि आबंटन सूची में जिनका नाम नहीं है उन्हें भी एक नहीं दो-दो दुकानें दे दी गई है । हाल यह है कि नगर पंचायत में ढेरों शिकायतें होने के बाद भी अधिकारी अपनी मनमानी पर उतर आए हैं । जिससे आमजनों में आक्रोश व्याप्त है ।
मिली जानकारी अनुसार एक माह पूर्व नगर पंचायत छुरिया में नगर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, पार्षद व सीएमओ के द्वारा अतिक्रमण से प्रभावित 49 दुकानदारों की सूची बनाई गई थी जिसे गुपचुप तरीके से नगर पंचायत के परिसर हाल में चस्पा कर दिया गया था । जहां प्रभावितों को छोड़कर नगर पंचायत के पार्षद, एल्डरमेन एवं उनके करीबी रिश्तेदारों का नाम भी सूची में शामिल था । तब से लेकर आज तक उस सूची को लेकर विवाद नगर में गरमाया हुआ था । इसी सूची को लेकर नगर पंचायत में दो दिन पूर्व बगैर मुनादी कराये लगभग 53 लोगों को मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की दुकानों की चाबी आनन-फानन में सौंप दी गई । हैरान करने वाली बात यह है कि इन दुकानदारों को अस्थायी तौर पर दुकानें दी गई लेकिन उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया गया है । जिसको लेकर दुकानदार भी असमंजस की स्थिति में है । इसी मामले को लेकर विवाद बढ़ गया है ।
जिनको दुकान मिला उनका एग्रीमेण्ट नहीं।
छुरिया-कल्लूबंजारी मार्ग में अतिक्रमण से प्रभावित दुकानदारों को नगर पंचायत अध्यक्ष के कार्यालय में सोमवार को बारी-बारी से 53 दुकानों की चाबी में नंबर अंकित कर सौंपा गया । जिसमें मनमानी करते हुए अपने चहेते एवं पैसे वालों को पहले से नंबर अंकित कर दुकान की चाबी सौंपी गई । जिसको लेकर दुकानदार अंसतुष्ट नजर आए । खास बात यह है कि जिनको दुकाने मिली उनका कोई एग्रीमेण्ट नहीं किया गया है । फिर आबंटन किस प्रक्रिया के तहत किया गया है यह जांच का विषय है ।
रातों-रात बांट दी गई 47 दुकानें।
सोमवार को नगर पंचायत में 53 दुकानदारों को चाबी सौंपने के बाद जो लोग अतिक्रमण से प्रभावित नहीं है एवं शासन के नियमानुसार दुकान लेने की पात्रता नहीं रखते हैं ऐसे लोगों को भी उनकी मनपसंद जगह पर लेनदेन कर 47 दुकानों की चाबियां रातो-रात दे दी गई है । जिसकी भनक भी स्थानीय लोगों को नहीं लगी । और न ही इन लोगों का नाम आबंटन प्रक्रिया की सूची में चस्पा की गई है ।
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