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Tuesday, October 31, 2023

शारदा महिला रामायण समिति का अखंड रामायण पाठ संपन्न

 शारदा महिला रामायण समिति का अखंड रामायण पाठ संपन्न



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


कोरबा (बाल्कोनगर) - मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराघवेन्द्र सरकार राम लला की असीम अनुकम्पा से शरद पूर्णिमा के पावन पर्व मिलन पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शारदा महिला रामायण समिति के तत्वाधान में श्रीमती रोहिणी पांडेय के नेतृत्व में श्रीराम चरितमानस अखण्ड पाठ का पच्चीसवां आयोजन श्रीमती रेखा रामकिशोर शर्मा के सौजन्य से श्री गौरी शंकर मंदिर सेक्टर -3 बालको में किया गया। श्रीराम चरित मानस गायन/वाचन में कथा वाचकों ने राम चरित मानस के सातों कांड का विशेष महत्व बताते हुये कहा कि राम चरित मानस मानव का सदैव मार्गदर्शन करते हैं , प्रथम कांड बालकांड हमें बताता है कि मानव को सदैव बालक बना रहना चाहिये , बालक बने रहेंगे तो निष्पाप रहेंगे।‌ उसके अंदर किसी प्रकार का दोष नहीं होता क्योंकि वह बालक है। राम चरित मानस के सभी कांड मानव को सदैव सीख देते हैं। दूसरे कांड अयोध्या के बारे में बताया गया कि अपने शरीर को अयोध्या जैसा बनायें इसमें कहीं कोई पापी नहीं रहता था। जब हमारा शरीर अयोध्या बन जायेगा तो निश्चित रूप से वहां प्रभु श्री राम निवास करेंगे। तीसरा अरण्यकांड है जो जंगल है जो बताता है कि व्यक्ति को जीवन भर बासना रहित रहना चाहिये। व्यक्ति के जीवन में जब बासना नहीं रहती है तो उसके हृदय में भगवान का बसेरा हो जाता है। चौथा कांड किष्किंधा कांड है जिसमें प्रभु श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता के बारे में बताया गया है जीवन में मित्र होना जरूरी है परंतु वह राम और सुग्रीव जैसे ही होना चाहिये , किष्किंधा कांड हमें अच्छे मित्रों से परिचय कराता है। पांचवे कांड सुंदरकांड है जिसमें हनुमानजी की कथा है जो हमें भक्ति करना सिखाते हैं , मानव के जीवन में जब भक्ति होगी तो निश्चित रूप से उसे भगवान के दर्शन होंगे। छठवां लंका कांड है जो मानव को युद्ध करना सिखाता है मानव को जीवन में काम क्रोध मोह अहंकार लोभ और मद से युद्ध करना चाहिये , लंका काण्ड में यही सिखाता है। जबकि सातवां उत्तरकांड मानव को त्याग का संदेश देते हुये हमें जीवन के सार को बताता है। इस प्रकार से राम चरित गायन/कथा समापन पश्चात हवन आरंभ करने के पूर्व पंडित चंद्रशेखर जोशी ने चारों ओर रामरक्षास्रोत बोलते हुये एक रेखा खींचा ताकि किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां पूजा तथा संकल्प को खंडित नहीं कर पाये। हवन आरंभ करने के पूर्व  इष्टदेव , गुरुदेव तथा पितृगणों तथा बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेकर हवन गौरीशंकर मंदिर बालको में हनुमानजी के समक्ष पूर्णाहुति पूर्ण हुआ।

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