खैरागढ़-चुनाव के लिए आई फोर्स की आवाजाही में लिए वाहन अधिग्रहित कर लिए गए
गातापार जंगल इलाके में सप्ताहभर से बसों का संचालन बंद होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ी
खैरागढ़. विधानसभा चुनाव में यात्री बसों के अधिग्रहण का असर अब सड़कों पर दिखने लगा है। शहर से होकर आवाजाही करने वाले यात्री बसों की संख्या कम होने लगी है तो दूसरी ओर कई स्थानों के लिए बसों का टोटा बन गया है। खैरागढ़ के वनांचल इलाके गातापार जंगल तक लोगाें की आवाजाही में लगी सभी बसाें के अधिग्रहण के चलते गातापार जंगल इलाके में यात्री बसों की आवाजाही सप्ताह भर से बंद हो गई है। गातापार जंगल इलाके में बसों का संचालन बंद होने के चलते इलाके के लोगों को जिला मुख्यालय आने के लिए रोजाना जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
गातापार जंगल इलाके को जिला मुख्यालय से जोड़ने रोजाना आधा दर्जन बसें फेरा लगाती हैं। इन बसों को चुनाव सहित सुरक्षा बलों के लिए अधिग्रहित कर लिया गया है। इसके चलते गातापार जंगल इलाके के दर्जनभर से अधिक गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इलाके में गातापार जंगल सहित मलैदा, करेलागढ़, सांकरी, लिमऊटोला, लक्षणा टोला, नवांगांव, बरगांव, टेमरी, गाड़ाघाट, चंगूर्दा, सिवनी, रंगकठेरा जैसे गांवों के ग्रामीण रोजाना कामों के चलते शहर पहुंचते हैं। इस मार्ग में चलने वाले वाहन पूरी तरह से सप्ताह भर से बंद हैं।
दुर्ग मार्ग में भी यही समस्या
गातापार जंगल इलाके में बस सेवा बंद होने के अलावा शहर से अन्य मार्गों में भी बसों के संचालन चुनाव के चलते प्रभावित हो रहे हैं। शहर से अलसुबह रायपुर जाने वाली बसें चुनाव और फोर्स में फंसी हुई होने के कारण माह भर से बंद है। इसके चलते सुबह से कार्यालयीन समय पर रायपुर पहुंचने वाले यात्रियों को मार्ग बदल कर यात्रा करनी पड़ रही है। धमधा रायपुर रूट में सुबह के समय चलने वाली बसें स्थगित चल रही हैं। राजनांदगांव कवर्धा, डोंगरगढ़, दुर्ग मार्ग भी बसों का टोटा शुरू हो गया है। चुनाव के दौरान इसमें और कमी से लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है।
स्वास्थ्य सहित अन्य सेवाओं के लिए बढ़ी दिक्कतें, लोग हलाकान
गातापार इलाके के इन गांवों के ग्रामीण रोजाना स्वास्थ्य, बाजार सहित खरीददारी करने बड़ी संख्या में शहर पहुंचते हैं। इसके अलावा अन्य कामकाज को लेेकर भी लोग बसों से सफर करते हैं। सप्ताह भर से बसों का संचालन बंद होने से इलाके के सामान्य लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को शहर आने मालवाहकाें सहित अन्य साधनों का इंतजार करना पड़ रहा है। इलाज सहित स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए शहर पहुंचने वालों को मशक्कत करनी पड़ रही है। अथवा निजी साधनों का इस्तेमाल करना मजबूरी बन गई है। कामकाज के सिलसिले में आवाजाही करने वालों को दुपहिया वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
छोटे वाहनों को परमिट नहीं
गातापार जंगल मार्ग में बड़ी संख्या में ऑटो सहित छोटे यात्री वाहन चलते हैं लेकिन खैरागढ़ से गातापार की दूरी 25 किमी होने और रास्ते में चंगूर्दा घाटी होने के चलते छोटे वाहनाें का गातापार तक का परमिट नहीं मिलता है। छोटे वाहन मार्ग में बैगाटोला तक ही आवाजाही करते हैं। बैगाटोला से गातापार की दूरी आठ किमी से अधिक हैं। ऐसे में गातापार इलाके के लोगों को वाहन पकड़ने मशक्कत कर पैदल अथवा दूसरे वाहनाें में बैगाटोला तक आना पड़ रहा है। जरूरत के दौरान सुविधा नहीं मिलने वाले लोग पैदल ही यह सफर पूरा कर रहे हैं।
सीएनआई न्यूज़ खैरागढ़ से सोमेश कुमार की रिपोर्ट


















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