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Tuesday, July 7, 2026

बिना लाइसेंस स्कूली छात्रों का दोपहिया चलाना, जिम्मेदार कौन - विद्यालय या अभिभावक?

 सी एन आई न्यूज रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा 9977708864


 बिना लाइसेंस स्कूली छात्रों का दोपहिया चलाना, जिम्मेदार कौन - विद्यालय या अभिभावक?



पिथौरा। शहर के अधिकांश स्कूलों में एक गंभीर तस्वीर सामने आ रही है। नाबालिग छात्र बिना ड्राइविंग लाइसेंस के धड़ल्ले से दोपहिया वाहन लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं। यातायात नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है, पर सवाल उठता है - इसका दोषी कौन?




जमीनी हकीकत

स्थानीय स्कूलों के बाहर सुबह-शाम का नजारा चौंकाने वाला है। 14 से 17 साल के बच्चे स्कूटी और बाइक से आते-जाते दिखते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार 18 साल से कम उम्र में बिना लाइसेंस गियर वाला दोपहिया चलाना गैरकानूनी है। पकड़े जाने पर 25 हजार तक जुर्माना और अभिभावक पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।


विद्यालय का पक्ष

कई स्कूल प्राचार्यों का कहना है, "स्कूल परिसर के अंदर हम वाहन की अनुमति नहीं देते। छात्र बाहर क्या करते हैं, इसकी जिम्मेदारी अभिभावकों की है। हम समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते हैं।" कुछ स्कूलों ने गेट पर नाबालिग छात्रों के वाहन लाने पर प्रतिबंध भी लगाया है।


अभिभावकों की मजबूरी या लापरवाही?

वहीं अभिभावकों का तर्क है कि बस सुविधा न होने और दूरी ज्यादा होने के कारण मजबूरी में गाड़ी देनी पड़ती है। कुछ का कहना है, "बच्चे जिद करते हैं, मना करने पर पढ़ाई का बहाना बनाते हैं।" लेकिन यातायात विशेषज्ञ इसे लापरवाही मानते हैं।


कानून क्या कहता है

कानून के अनुसार, "नाबालिग को वाहन देना मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत दंडनीय है। अभिभावक पर 25,000 रुपये जुर्माना और 3 साल तक की सजा हो सकती है। वाहन का रजिस्ट्रेशन भी 1 साल के लिए रद्द हो सकता है।"


समाधान कहां है

1. अभिभावक : पहली जिम्मेदारी अभिभावक की बनती है। नाबालिग को वाहन देना सीधे तौर पर कानून तोड़ना है।

2. विद्यालय : स्कूल गेट पर सख्ती, अभिभावकों के साथ मीटिंग और छात्रों की काउंसलिंग करें। 

3. प्रशासन : स्कूलों के बाहर नियमित जांच अभियान चलाए। स्कूल बस सुविधा बढ़ाने पर जोर दे।


दोष सिर्फ एक का नहीं

असल में यह तीनों की साझा जिम्मेदारी है। अभिभावक की लापरवाही, विद्यालय की ढिलाई और प्रशासन की अनदेखी मिलकर बच्चों की जान खतरे में डाल रही है। एक दुर्घटना पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है। 


फिलहाल जरूरत है कि अभिभावक कानून समझें, स्कूल नियम सख्त करें और पुलिस अभियान चलाए। वरना "काश" कहने के सिवा कुछ नहीं बचेगा।

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