पखांजूर/कांकेर से CNI NEWS शंकर सरकार की रिपोर्ट। मो-6268535584
पखांजूर : प्रदूषण प्रमाणपत्र समाप्त एंबुलेंस देने पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले—"जर्जर सड़क और ओवरलोड वाहनों की समस्या छोड़ सिर्फ दिखावा कर रहा माइंस प्रबंधन"
सूरजागढ़ माइंस प्रबंधन द्वारा परलकोट क्षेत्र को कथित तौर पर पच्चीस माह पुरानी तथा पंद्रह माह से टैक्स नहीं पटाया, एक माह से फिटनेस खत्म एवं एक वर्ष से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) समाप्त हो चुकी एंबुलेंस उपलब्ध कराए जाने के दावे के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है।
पहले से ही ओवरलोड माइंस वाहनों के कारण स्टेट हाईवे-25 की जर्जर स्थिति, पुल-पुलियाओं में दरारें और धूल-प्रदूषण से परेशान ग्रामीण अब इस कदम को केवल "छवि सुधारने का प्रयास" बता रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस कंपनी के भारी वाहन लगातार सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, पुल-पुलियाओं पर अत्यधिक दबाव डाल रहे हैं और क्षेत्र में धूल-प्रदूषण फैला रहे हैं, वही कंपनी अब प्रदूषण प्रमाणपत्र समाप्त हो चुकी एंबुलेंस देकर सामाजिक दायित्व निभाने का दावा कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र ही वैध नहीं है, तो उसकी तकनीकी स्थिति और उपयोगिता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस संबंध में जब खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वैष्णव से चर्चा की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा, "हमारे पास अभी तक किसी भी संस्था या माइंस प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध कराए जाने की कोई जानकारी नहीं है। हमारे शासकीय अस्पताल को किसी प्रकार की एंबुलेंस प्राप्त नहीं हुई है।"
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने भी अस्पताल में जानकारी ली, जहां उन्हें बताया गया कि अस्पताल को कोई एंबुलेंस नहीं मिली है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर माइंस प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस देने के दावे और तस्वीरें प्रसारित की जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह केवल वाहवाही लूटने और प्रचार पाने का प्रयास है। उनका कहना है कि यदि कंपनी की मंशा वास्तव में जनसेवा की होती, तो नई और पूरी तरह वैध दस्तावेजों वाली एंबुलेंस सीधे शासकीय अस्पताल को उपलब्ध कराई जाती, न कि केवल सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर प्रचार किया जाता।
ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी आपातकालीन वाहन का पूरी तरह फिट तथा सभी वैध दस्तावेजों के साथ संचालित होना आवश्यक है। यदि दुर्घटना या तकनीकी खराबी की स्थिति उत्पन्न होती है तो मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है। साथ ही दस्तावेजों में कमी होने पर कानूनी और बीमा संबंधी जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सबसे पहले माइंस प्रबंधन को अपने ओवरलोड वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करनी चाहिए, जिससे स्टेट हाईवे-25 और पुल-पुलियाओं पर बढ़ रहा दबाव कम हो। उनका कहना है कि सड़कें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन गए हैं और पुल-पुलियाओं में दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। ऐसे में यदि सड़क ही सुरक्षित नहीं होगी तो एंबुलेंस भी समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पाएगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी का उद्देश्य क्षेत्र की मूल समस्याओं—जर्जर सड़क, धूल प्रदूषण, ओवरलोड वाहनों और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियाओं—से लोगों का ध्यान हटाकर केवल प्रचार हासिल करना है। उनका कहना है कि फोटो खिंचवाने और वाहवाही लूटने से क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कथित तौर पर दावा किये जा रहे एंबुलेंस के फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी), पंजीयन तथा अन्य सभी वैध दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाए, ताकि जनहित और मरीजों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो सके।




















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