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Monday, December 28, 2020

प्रधानमंत्री ने दी 100वीं किसान रेल की सौगात

 


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


नई दिल्ली -- नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बार्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश की 100वीं किसान रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रेल महाराष्ट्र के सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार के लिये रवाना हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान रेल सेवा देश के किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। इससे खेती से जुड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आयेगा। उन्होंने कहा कि इससे देश की कोल्ड सप्लाई चेन की ताकत भी बढ़ेगी। वही केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि हमारी सरकार मानती है कि किसानों की समृद्धि ही देश की समृद्धि है। किसान रेल के फायदे गिनाते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अब किसान रेल जैसी सुविधा से पश्चिम बंगाल के लाखों छोटे किसानों को एक बहुत बड़ा विकल्प मिला है और ये विकल्प किसान के साथ ही स्थानीय छोटे-छोटे व्यापारी को भी मिला है। वो किसान से ज्यादा दाम में ज्यादा माल खरीदकर किसान रेल के ज़रिये दूसरे राज्यों में बेच सकते हैं। कृषि से जुड़े एक्सपर्ट्स और दुनियाँ भर के अनुभवों और नई टेक्नॉलॉजी का भारतीय कृषि में समावेश किया जा रहा है। स्टोरेज से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर खेती उत्पादों में वैल्यू एडिशन से जुड़े प्रोसेसिंग उद्योग, ये हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं।पीएम मोदी ने आगे कहा कि पीएम कृषि संपदा योजना के तहत मेगा फूड पार्क्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर, ऐसे करीब साढ़े छह हजार प्रोजेक्ट स्वीकृत किये गये हैं , जिसमें से अनेक प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं और लाखों किसान परिवारों को उसका लाभ मिल रहा है। आत्मनिर्भर अभियान पैकेज के तहत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिये 10 हज़ार करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। पीएम ने कहा हमारे देश में भंडारण की क्षमताओं का अभाव हमेशा से किसान के लिये एक बड़ी चुनौती रही है। हमारी सरकार इन समस्याओं के निदान के लिये करोड़ों का निवेश तो कर ही रही है, किसान रेल जैसी सुविधा भी दे रही है। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों को कम खर्च में बड़े से बड़ा बाजार देने के लिये हमारी नीयत भी साफ है और हमने बजट में भी इसकी घोषणा कर दी है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब हम कहते हैं कि हमारी सरकार देश के किसानों की पहुंँच को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक बढ़ा रही है, तो हम ये बात हवा में नहीं कहते हैं बल्कि ये जमीन पर हो रहा है। कुछ ही दिनों में ऐसी रेल की मांँग इतनी बढ़ गई कि सप्ताह में तीन दिन ये रेल चलानी पड़ती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये इसका भी प्रमाण है कि हमारे किसान नई संभावनाओं के लिये कितनी तेजी से तैयार हैं। किसान दूसरे राज्यों में भी अपनी फसलें बेच सकें उसमें किसान रेल और कृषि उड़ान की बहुत भूमिका है। मुझे यकीन है कि पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को उड़ान का लाभ मिलने लगा है। किसान रेल के किसान को कैसे फायदा हो रहा है। किसान रेल में सरकार 50 फीसदी छूट भी दे रही है, इसका भी किसानों को लाभ हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान ट्रेन एक तरह से चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज भी है। इसमें फल, सब्जी, दूध, मछली और जल्दी खराब होने वाली बाकी चीजें पूरी सुरक्षा के साथ पहुंच रही हैं। पहले यही सामान किसान को सड़क मार्ग के माध्यम से ट्रकों से भेजना पड़ता था, जिसमें कई समस्यायें हैं। इसमें समय बहुत लगता है, किराया ज्यादा लगता है। गांँव में उगाने वाला हो या शहर में खाने वाला, दोनों के लिये यह महंगा पड़ता है। उन्होंने कहा, यह किसान रेल पश्चिम बंगाल के लाखों छोटे किसानों को बहुत फायदा पहुंँचायेगी। इस रेल के माध्यम से उन्हें एक बहुत बड़ा विकल्प मिला है और ये विकल्प किसान के साथ ही स्थानीय छोटे-छोटे व्यापारी को भी मिला है। वो किसान से ज्यादा दाम में ज्यादा माल खरीदकर किसान रेल के जरिये दूसरे राज्यों में बेच सकते हैं। कृषि से जुड़े एक्सपट्र्स और दुनियाँ भर के अनुभवों और नई टेक्नॉलॉजी का भारतीय कृषि में समावेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों में रोजगार पैदा करने के लिये , किसानों को बेहतर जीवन देने के नई सुविधायें ,  नये समाधान देना बहुत जरूरी है। उपज का भंडारण हो या फसल का उत्पादन, सभी को बेहतर बनाना हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को सुविधायें देने के लिये रेलवे स्टेशनों के पास पेरिशेबल कारगो सेंटर बनाये जा रहे हैं। स्टोरेज से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर खेती उत्पादों में वैल्यू एडिशन से जुड़े प्रोसेसिंग उद्योग, ये हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं।पीएम कृषि संपदा योजना के तहत मेगा फूड पाक्र्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर, ऐसे करीब साढ़े छह हजार प्रोजेक्ट स्वीकृत किये गये हैं। आत्मनिर्भर अभियान पैकेज के तहत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिये 10 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं।  प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अगर सरकार देशवासियों की छोटी-छोटी जरूरतें भी पूरी कर पा रही है तो इसका कारण सहभागिता है। कृषि से जुड़ी सभी सुधारों के पीछे किसानों की सहभागिता है।


अगस्‍त में शुरू हुई थी पहली ट्रेन


भारतीय रेलवे ने पहले किसान ट्रेन की शुरुआत इस साल अगस्त में महाराष्ट्र के देवली से बिहार  के दानापुर के बीच की थी बाद में इस ट्रेन को मुजफ्फरपुर तक बढ़ा दिया गया।


नौ रूटों पर चल रही है किसान रेल


भारतीय रेलवे द्वारा फिलहाल 9 रूटों पर किसान रेल का संचालन किया जा रहा है और अब तक किसान रेल से 27000 टन कृषि उत्पादों का ट्रांसपोर्टेशन किया जा चुका है.। केंद्र सरकार ने फल और सब्जियों के परिवहन पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी बढ़ा दी है. बता दें कि सरकार ने इस साल के बजट में किसान रेल चलाने की घोषणा की थी।

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