कान, सूंड़, पेट, आंखें, दांत, चूहा.. गणपति की हर चीज देती है बड़ी सीख
गणेश चतुर्थी की धूम शुरू हो चुकी है।
सी एन आइ न्यूज़ -पुरुषोत्तम जोशी ।
रायपुर-राजधानी रायपुर में गणपति बप्पा की धूम धाम शुरू हो चुकी है। राजधानी वासी प्रतिमा को अपने-अपने घरों में विराजमान करने की तैयारियों में जुटे हैं। सबसे पहले पूजे जाने वाले इस देवता की प्रतिमा दिखती भी सबसे अलग हैं। उनकी प्रतिमा की हर एक चीज हमें कुछ न कुछ सिखाती है। चाहे वह गणपति के कान हों या उनकी सूंड़, उनकी आंखें हों या उनके दांत। गणपति के बड़े पेट से लेकर उनकी सवारी चूहा भी हमें जिंदगी की बड़ी सीख देते हैं
बड़ा_सिर
गणपति का शरीर तो मनुष्य का है, लेकिन सिर हाथी का। हाथी एक ऐसा जीव है जिसका दिमाग धरती पर मौजूद अन्य जंतुओं की तुलना में सबसे बड़ा होता है। दुनियाभर में हाथी को सबसे बुद्धिमान माना जाता है। इसलिए गणपति का बड़े आकार का सिर हमें बड़ा सोचने की सीख देता है।
बड़े_कान
हाथी अपने सुनने की अद्भुत क्षमता के लिए भी जाने जाते हैं। गणपति के बड़े और सूप के आकार के कान हमें धैर्य के साथ ज्यादा सुनने की सीख देते हैं। साथ ही यह भी बताते हैं कि बेकार की बातों को छान कर बाहर फेंक दें।
सूंड़
गणपति की सूंड़ अनुकूलनशीलता का प्रतीक है। यह हमें समय और जरूरत के अनुसार जिंदगी में आने वाली अलग-अलग परिस्थितियों में ढल जाना सिखाती है। उनकी सूंड़ की ही तरह अपनी जिंदगी में परिस्थितियों को लेकर लचीला होना सिखाती है।
छोटा_मुंह
गणपति के मुंह का आकार उनके चेहरे की तुलना में काफी छोटा है। यह छोटा मुंह सिखाता है कि हमें कम बोलना चाहिए। सिर्फ तभी बोलना चाहिए जब जरूरत हो।
छोटी_आंखें
हाथी की तरह ही गणपति की आंखें भी छोटी हैं। उनकी ये छोटी आंखें एकाग्रता की सीख देती हैं। हाथी के साथ एक तथ्य यह भी है कि उन्हें चीजें उनके वास्तविक आाकर से बड़ी दिखती हैं। इसलिए इन छोटी आंखों से हमें हमेशा बड़ा परिदृश्य देखने और दिग्भ्रमित करने वाली चीजों से बचने की सीख लेनी चाहिए।
बड़ा_पेट
यह जिंदगी का जश्न मनाने का भी प्रतीक है। गणपति का बड़ा पेट हमें सिखाता है कि हमें जिंदगी में सभी अच्छी-बुरी चीजों को पचा कर इनसे ऊपर उठना चाहिए। बड़े पेट से यह भी सीख मिलती है कि हमें अपनी पाचन क्षमता अच्छी रखनी चाहिए। यानी जिन बातों को फैलाने की जरूरत नहीं है उन्हें अपने अंदर ही पचा लेना चाहिए।
दो_दांत
गणपति के दो दांत हैं- एक दांत आधा टूटा हुआ है और दूसरा पूरा है। ये दांत बताते हैं कि जिंदगी में सही और गलत, भावनात्मक और व्यवहारिक जैसे विकल्प काफी विवाद उत्पन्न करते हैं। ये दो दांत दो विकल्प की तरह हैं। टूटा हुआ दांत यह सीख देता है कि हमें हर कठिनाई से ऊपर उठकर सही फैसले लेने चाहिए।
चूहा
गणपति की सवारी है चूहा या मूषक। चूहा उन इच्छाओं का प्रतीक है जिनसे हम घिरे रहते हैं। यह सिखाता है कि अगर हमने अपनी इच्छाओं, चाहतों पर नियंत्रण नहीं किया तो ये हमें बर्बाद कर देती हैं।
गणपति के चरणों में बैठा चूहा हमें अपने अहंकार पर काबू करना सिखाता है। इससे यह भी सीख मिलती है कि जब चीजें आपके हित में न हों, तो भी हार न मानें। हर नकारात्मकता को कुतर कर अपना रास्ता खुद बनाएं।
गणपति_बप्पा के विराजमान होने _का_तरीका
ज्यादातर मंदिरों और गणपति पंडालों में गणेश जी की मूर्तियों के बैठने का तरीका एक समान है। इसमें उनका एक पैर जमीन पर और दूसरा थोड़ा ऊपर रहता है। इस अवस्था से हमें जिंदगी की सबसे बड़ी सीख मिलती है। यह सिखाता है कि आप अपना लक्ष्य ऊंचा रखें, लेकिन धरती (अपनी जड़ों) से हमेशा जुड़े रहें।



















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