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Thursday, October 15, 2020

हिन्दू शब्द के शास्त्रोक्त प्रमाण -- पुरी शंकराचार्य



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


जगन्नाथपुरी -- ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनमठ पुरीपीठ के 145 वें वर्तमान शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाभाग हिन्दू शब्द के संबंध में शास्त्रोक्त प्रमाण हेतु संकेत करते हैं कि यह प्रश्न उठाया जाता है कि आर्य , वैदिक और सनातनी शब्द शास्त्रसम्मत और परम्पराप्राप्त होने पर भी क्या हिन्दू शब्द का शास्त्रोक्त प्रमाण है ? अधिकांश बुद्धिजीवियों की धारणा तो यही है कि हिन्दू नाम मुसलमानों का रक्खा हुआ है जो कि हीनता का वाचक है , परन्तु वस्तुस्थिति यह है कि मुहम्मद और ईसा से भी सैकड़ों वर्ष पूर्व हिन्दू शब्द का प्रयोग सौम्य , सुन्दर , सुशोभित, शील निधि, दमशील और दुष्टदलन में दक्ष आदि विभिन्न अर्थों में प्रयुक्त और प्रचलित था। सिकन्दर ने भारत में आकर अपने मन्त्री से हिन्दूकुश पर्वत के दर्शन की इच्छा व्यक्त की थी। अवेस्ता में हजारों वैदिक शब्द उल्लेखित है जो सिकन्दर से भी सैकड़ों वर्ष पूर्व का ग्रंथ है , उसमें हिन्दू शब्द का प्रयोग है। बलख नगर का नाम पूर्वकाल में हिन्दवार था। स के स्थान पर ह का प्रयोग प्रसिद्ध है। सप्त को हप्त , सरस्वती को हरहवती , सरित् को हरित् , केसरी को केहरी , असुर को अहुर कहने की विधा और प्रथा है। भविष्यपुराण में हिन्दुस्थान को सिन्धुस्थान आर्यों का राष्ट्र कहा गया है। कालिकापुराण और शार्ङ्गधरपद्धति के अनुसार वेदमार्ग का अनुसरण करने वाले हिन्दु मान्य हैं। उल्लेख है कि कालबली के कुचक्र के कारण कलि में अधर्म से वैदिक धर्म के आच्छन्न हो जाने पर तथा घोर आक्रान्ता यवनों से भारत के विविध भूभाग उत्पीड़ित हो जाने पर हिन्दू विन्ध्यपर्वत चले गये। हिमालय का प्रथम अक्षर ह् है, इन्दुसरोवर के प्रारम्भ के दो अक्षर इन्दु है। ह् और इन्दु को मिलाने पर हिन्दु शब्द बनता है। बृहस्पति आगम के अनुसार हिमालय से इन्दुसरोवर तक का देवनिर्मित भूभाग हिन्दुस्थान कहा जाता है , इसमें परम्परा से निवास करने वाले और उनके वंशधर हिन्दु कहे जाते हैं। महाभारत काव्य के अनुसार पूर्व में समुद्र से लेकर पश्चिम में समुद्र पर्यन्त तथा उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में विन्ध्य पर्वत पर्यन्त आर्यावर्त कहा जाता है। वृद्धस्मृति के अनुसार हिंसा से दु:खित होने वाला वर्णोचित आचरण सम्पन्न , वेद गोवंश और देवप्रतिमासेवी हिन्दू समझने योग्य है। माधवदिग्विजय के अनुसार सनातनी , आर्यसमाजी , जैन  , बौद्ध और सिक्ख आदि में अनुगत लक्षण के अनुसार ओंकार को मूलमन्त्र मानने वाला , पुनर्जन्म में दृढ़ आस्था रखने वाला , गोभक्त और भारतीय मूल के सत्पुरूष द्वारा प्रवर्तित पथ का अनुगमन करने वाला तथा हिंसा को निन्द्य मानने वाला हिन्दू कहने योग्य है।

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