अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
पटना -- लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (74 वर्ष) का गुरुवार को दिल्ली के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में निधन हो गया था। जहाँ जनपथ स्थित उनके आवास पर जाकर महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी थी। उसके बाद इनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को देर शाम वायु सेना के विशेष विमान से पटना लाया गया। यहाँ पहुँचते ही सेना की टुकड़ी ने उनके पार्थिव शरीर को गार्ड आफ आनर दिया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी , केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रदाँजलि दी। वहाँ से रामविलास पासवान अमर रहे का नारा लगाते हुये उनका पार्थिव शरीर विधानसभा लाया गया यहाँ भी मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष सहित सरकार के कई मंत्री , विधायकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किये। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को लोजपा कार्यालय ले जाया गया जहाँ पार्टी के नेता , कार्यकर्त्ताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। रात को उनका पार्थिव शरीर पटना के श्रीकृष्णापुरी आवास लाया गया। यहाँ से सेना के विशेष विमान से आज उनकी अंतिम यात्रा निकाली गयी , जिसके दौरान कार्यकर्त्ता " गूँजे धरती आसमान , रामविलास पासवान " जैसे नारे लगाते रहे। बिहार के मुख्यमंत्री सहित सरकार के कृषि मंत्री डॉ० प्रेम कुमार ने रामविलास पासवान को ‘भारत रत्न’ देने की मांग की है। वहीं कुछ समर्थकों ने सांसद में उनकी आदम कद की प्रतिमा लगाये जाने की मांग भी उठायी। शुक्रवार की दोपहर दीघा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया , उनके पुत्र चिराग पासवान ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान घाट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, गिरिराज सिंह, बिहार सरकार के मंत्री प्रेम कुमार, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पप्पू यादव समेत कई नेता शामिल रहे। अंतिम संस्कार में केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्रिपरिषद का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय कानून एवं विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘रामविलास जी बिहार ही नहीं, देश के नेता थे, वो एक जन नेता थे। मैं अटल जी की सरकार में उनके साथ कोयला खान राज्य मंत्री था, मैं उनकी क्षमता जानता हूंँ। वो उपेक्षितों की एक बहुत बड़ी आवाज बने। ये उनके जाने का समय नहीं था। वे देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक थे , वे नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा सांसद रहे। उन्होंने अपने क्षेत्र में दलितों की आवाज़ बुलंद की, जिसके बाद कई मुकामों पर पहुंँचे। वे वीपी सिंह, एचडी देवे गौड़ा, इन्द्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और वर्तमान में नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे।


















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