अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायगढ़ -- वैसे तो हम प्रतिदिन हाथ धोते हैं लेकिन प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर को हाथ धोने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की पूर्व संध्या जिंदल के आशा द होप में शिक्षिका कुमारी चंचला पटेल ने चर्चा के दौरान अरविन्द तिवारी को बताया कि हाथों की धुलाई का अर्थ है बीमारियों को रोकना , स्वच्छता को अपनाना और स्वच्छता पर जागरूकता फैलाना जिससे लोग बीमार ना पड़ें और स्वस्थ रहें। हमारे हाथों में अनदेखी गंदगी छिपी होती है, जो किसी भी वस्तु को छूने, उसका उपयोग करने एवं कई तरह के दैनिक कार्यों के कारण होती है। यह गंदगी, बगैर हाथ धोये खाद्य एवं पेय पदार्थों के सेवन से हमारे शरीर में जाती हैं, और बीमारियों को जन्म देती हैं। भोजन करने जैसे कुछ महत्वपूर्ण कार्य करने के पहले हाथ धोना बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छी तरह साबुन से हाथ धोने से बीमारियों के संक्रमण का खतरा बहुत हद तक कम किया जा सकता है। हाथ धुलाई करने वाले बच्चों में से ज्यादातर रोग के संक्रमण से मुक्त हो जाते हैं। इसी तरह श्वसन सम्बन्धी संक्रमण के मामले में भी एक चौथाई तक की कमी आती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्वच्छ हाथ ही हमारे स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कुंजी है। ज्यादातर मामलों में बच्चों के हाथ गन्दे होने से ही बीमारियों के रोगाणु उनके शरीर में प्रवेश करते हैं। जो बच्चे साफ-सफाई का ध्यान रखते हुये नियमित इस आदत का पालन करते हैं उनमें बीमारियों की संभावना भी कई गुना तक कम हो जाती है साथ ही उनमे रोग प्रतिरोधक यानी रोगों से लड़ने की क्षमता भी काफी हद तक बढ़ जाती है। कई कुपोषित बच्चों में भी देखा गया है कि साफ-सफाई के अभाव तथा हाथ नहीं धोने से वे संक्रमण का शिकार हो जाते हैं और दिन-ब-दिन बीमार रहने लगते हैं। इनका शरीर कमजोर होने लगता है और धीरे-धीरे ये गम्भीर रोगी होकर एक दिन मौत की नींद सो जाते हैं।दरअसल हाथ धुलाई स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का ही एक हिस्सा है। क्योंकि हाथ की धुलाई से बीमारियों से बचा जा सकता है, और यह बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक अच्छी पहल है। हर व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति इन छोटी-छोटी बातों के प्रति सजग होना चाहिये ताकि हम एक स्वास्थ समाज का निर्माण कर सकें। विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस पर चिंता व्यक्त करते हुये चंचला पटेल ने कहा कि साल में केवल एक दिन स्कूलों में बच्चों के हाथ धुलाये जाने की प्रक्रिया अपनायी जाती है , उसके बाद साल भर इस पर कोई ध्यान ही नहीं देता कि बच्चे हाथ धो रहे हैं या नहीं। यही वजह है कि यह अभियान आदत बनने की जगह केवल उत्सवधर्मिता में बदलता जा रहा है , जिस पर गहरी चिंतन मनन करते हुये हम सबको हाथ धुलाई को अपना महत्वपूर्ण कार्य बनाने की आवश्यकता है।


















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