दल्लीराजहरा :- छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कांग्रेस सरकार के जनप्रिय नेता माननीय भुपेश बघेल जी द्वारा छत्तीसगढ़ में १८+ वालों का टिकाकरण किये जाने हेतू प्राथमिकता तय कर लिये गये निर्णय से राज्य के भाजपाई नेता और कार्यकर्ता बौखलाहट में इसे जाति और आरक्षण के साथ जोड़ रहे हैं। यह इनके बिमार मानसिकता और कोविड प्रबंधन और नियंत्रण में पुरी तरह असफल अपने प्रधानमंत्री की नाकामियों पर पर्दा डालने का एक हताश प्रयास के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।
राज्य के भाजपाई नेता और कार्यकर्ता जो दिन-रात, एक देश, एक विधान, एक निशान का राग अलापने फिरते हैं वे अपने नेता व प्रधानमंत्री जी से यह क्यों नहीं पुछते की आर्थिक रुप से टुट चुके और कोरोना महामारी से तबाह होते देश में एक ही वेक्सिन का तिन अलग-अलग मुल्य क्यों? जबकि वेक्सिन बनाने वाली सिरम इंस्टीट्यूट के सीईओ आधार पुनावाला कह चुके हैं की १५० रु में एक वेक्सिन बेचकर भी वे लाभ कमा रहे हे। फिर ऐसे आपदा काल में केंद्र, राज्यों और नीजि क्षेत्र के लिए अलग-अलग मुल्य क्यों? क्यों केन्द्र सरकार १५० रुपया में १०० प्रतिशत वेक्सिन खरिद कर सभी राज्यों और लोगों को वेक्सिन उपलब्ध नहीं करा रही है! जबकि केन्द्र सरकार ने फरवरी में पेश किये २०२०-२१ के बजट में वैक्सिन के विकास, वितरण और टिकाकरण के लिए ३५००० करोड़ का प्रावधान किया है वहीं पीएम केयर फंड बनाकर अरबों रुपय चंदा एकत्रित कर रही है। यह पैसा कहां है? वहीं वैक्सिन की सौ प्रतिशत खरिदि क्यों नहीं कर रहे हो करकेज्ञकेन्द्र से यही सवाल माननीय उच्च और सर्वोच न्यायालय भी पुछ रही है। कोई जवाब है मित्रो? भाजपाई नेता और कार्यकर्ता केन्द्र सरकार के इस असंवेदनशील और अव्यवहारिक कार्यनीति पर खामोश क्यों है! क्या प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा कोरोना महामारी के इस भयंकर विपदा काल में भी आपदा में अवसर तलाश नहीं कर रही हैं?
आज कोरोना का टिकाकरण करना राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इसकी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है। भाजपाई बतायेंगे की पिछले ७३ वर्षों में केन्द्र की किस सरकार ने राष्ट्रीय कार्यक्रम का आर्थिक बोझ राज्य सरकारों पर थोपा है? खुद को राष्ट्रवादी, ईमानदार बताने वाली यह केन्द्र की पहली सरकार है जो राष्ट्रीय कार्यक्रमो का आर्थिक बोझ वह भी अनाप-शनाप मुल्य पर खरिदने के लिए राज्यों पर भारी-भरकम आर्थिक बोझ डाली है
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राज्य के भाजपाई नेताओं और कार्यकर्ताओं के पास इस सवाल का जवाब है क्या कि जब २०१४ में पूर्ण बहुत प्राप्त कर भाजपा और उनके नेता मोदी जी केन्द्र में पहुंचे उस समय उन्हें विरासत में ८ प्रतिशत से ज्यादा वाली अर्थव्यवस्था मिली थी किन्तु सरकार चलाने की अज्ञानता, अनुभवहिनता, मेंहनत मशक्कत कर जीवन यापन करने वाले गरीब व मध्यम वर्गों के प्रति असंवेदनशीलता और सिर्फ चंद पूंजीपति मित्रो कारपोरेट घरानों के हितों को साधने की अनैतिक नीति, गलत निर्णयों के चलते देश की अर्थव्यवस्था १प्रतिशत पर पहुंच गई जिसके परिणाम स्वरुप इतिहास में पहली बार देश विकासशील देशों की सूची से निकलकर गरीब देशों की सूची में आ गया और उस पर भी भाजपा नीत गठबंधन की सरकार के प्रधानमंत्री जी कोरोना काल में देश की स्वास्थ्यगत संसाधनों को देश की जरुरत अनुसार आने वाले विपदा काल के लिए सहेज कर रखने की बजाए, कोरोना के खतरनाक दूसरे लहर से देश के नागरिकों के स्वास्थ्य की चिंता करने के बजाय खुद की छवि को निखारने और खुद को वैश्विक नेता के रुप में स्थापीत करने के लिए दूसरे देशों को वेन्टिलेटर, आक्सिजन बेच (निर्यात) रहे थे, जरुरी दवाईयों को बांट रहे थे, ६.५ करोड़ वैक्सिन का डोज बांट दिये। आज इन्हीं की कमियों से लोग अकाल मौत मर रहे हैं। उनकी इस व्यक्तिगत छवि निखारने वाली कुनीति से भारत में मची अफरा-तफरी के लिए आज वैश्विक मिडिया से लेकर वैश्विक राजनेता तक उन पर हंस रहे हैं, उनकी मुर्खतापूर्ण कार्यशैली और कार्यनीति पर उंगली उठा रहे है।
इनके उपरोक्त मुर्खतापूर्ण कार्यों और कोरोना प्रबंधन, नियंत्रण में असफलता, वैक्सिन उपलब्ध कराने में भेदभाव व जान बुझकर सभी के लिए वैक्सिन उपलब्ध नहीं करवाने की असंवेदनशील-अनैतिक राजनैतिक षड्यंत्र, वैक्सिन बनाने वाली कंपनी को अनियंत्रित मुनाफा कमाने की खुली छुट देने की जनविरोधी नीति और सबसे महत्वपूर्ण वैक्सिन के अभाव व आगे चलकर नीजी क्षेत्र द्वारा वैक्सिन का अनाप-शनाप मुल्य पर बेचने की संभावना को ध्यान में रखकर ही छत्तीसगढ़ सरकार ने टिकाकरण करने में अंत्योदय, बीपीएल, एपीएल को क्रम से प्राथमिकता देने और उसके बाद में आर्थीक रुप से सक्षम उच्च वर्गों का टिकाकरण करने का निर्णय लिया है। जोकि असंवेदनशील मोदी सरकार द्वारा राज्यों के लिए जानबुझकर पैदा की गई विषम परिस्थितियों से निकलने व जनता को राहत देने का मुंह तोड़ जवाब है।
टिकाकरण के लिए केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा पैदा की गई विषम परिस्थितियों में छत्तीसगढ़ सरकार के इस जन हितैषी निर्णय में जाति और आरक्षण जोड़ने वाले मुर्खो को पता होना चाहिए की अंत्योदय, बीपीएल से लेकर एपीएल कार्डधारीयो में सभी जाति और धर्म के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों के विचारक-समर्थक भी है। ऐसे में भाजपाइयों के गोबर ज्ञान पर सिर्फ हंसी आती है और तरह आता है।
राज्य के भाजपाई नेताओं और कार्यकर्ताओं अगर आपमें छत्तीसगढ़ की ९० प्रतिशत गरीब जनता जिसमें सभी जातियों-धर्मो और राजनैतिक दलों के समर्थक हैं, इनके प्रति सच में फिक्र है जैसा की आप शोर मचा रहे हो तो बे-सिर-पैर और बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करे और हिम्मत है तो मेरे द्वारा रखे ग्रे तथ्य पर तथ्यों के आधार पर अपने प्रिय प्रधानमंत्री से सवाल करे की मोदी जी आप अपनी जिम्मैदारी से पिछा छुड़ाकर छत्तीसगढ़ के करोड़ों लोगों के जिवन को जानलेवा महामारी काल में बीच मझधार में छोड़कर क्यों भाग गये जबकि छत्तीसगढ़ की जनता ने ११ में से १० लोकसभा सांसद भाजपा को चुनकर दिया है।
भवदीय
रवि जायसवाल
पूर्व उपाध्यक्ष न.पा.परि., द. राजहरा
सचिव, जिला कांग्रेस कमेटी
जिला-बालोद, छत्तीसगढ़।
सी. एन .आई. न्यूज के लिए दल्लीराजहरा से प्रदीप सहारे की रिपोर्ट


















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