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Wednesday, May 12, 2021

उत्तर भारत में होने वाले फूलों की खेती से महक गया किशोर का घर आंगन



देव यादव सी एन आई न्यूज़ बेमेतरा

बेमेतरा नवागढ़। पिछले कई वर्षों से ओला वृष्टि अति वृष्टि या सूखे की दंश झेल रहे नवागढ़ तहसील के किसान अब कैमोमिल (गुलेबबुना फूल की खेती) की खेती में अपनी किस्मत बदल रहे हैं। पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत लगाकर 60 से 70 हजार रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। नगर पंचायत नवागढ़ के युवा प्रगतिशील किसान किशोर राजपूत कैमोमिल की उन्नत किस्म सिम सम्मोहक की खेती करके सफलता प्राप्त की हैं। हार्ड मेहनत के बाद भी कई बार किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है।

 इसे देखते हुए युवा किसान ने औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा देने का फैसला कर नित नए नए प्रयोग करते रहते हैं।इसी शृंखला को आगे बढ़ाते हुए उत्तर भारत में होने वाले तीन महीने की एक फसल कैमोमिल की खेती करने का निर्णय लिए जो काफी फायदेमंद साबित रहा। इसकी  फसल कम लागत और कम पानी में होती है।इसका वनस्पतिक नाम कैमोमिला रिक्युटिटा हैं।इसमे कैमोजुलीन रसायन की मात्रा 17-18 प्रतिशत होती है तथा इसकी उन्नत किस्म सिम उज्वला में मेटिकेरिया एसिड ईस्टर 75 से 80 प्रतिशत प्रमुख रासायनिक घटक होता है।

क्या है कैमोमिल आइये जानते हैं


कैमोमिल एक विशेष प्रकार का फूल है, जिसका उपयोग विभिन्न सौंदर्य उत्पादों साबुन शैम्पू, क्रीम,घरेलू दवाइयों,माउथ फ्रेशनर,फार्मास्युटिकल,रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल कम करने,पेट संबंधी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। एरोमाथेरेपी में भी इसका उपयोग किया जाता है,इसकी बनी चाय से मुंह की दुर्गंध,दांत दर्द जैसे विकार दूर होते हैं।

इसके लिए जमीन कैसे होना चाहिए


समुचित जल निकासी, भुरभुरी, समतल, ढाल वाली जमीन, बलई, दोमट मिट्टी उपयुक्त होता हैं।


जलवायु कैसा होना चाहिए


समशीतोष्ण जलवायु, ऊँची भूमि, पाला एवं उच्च आद्रता के प्रति संवेदनशील होता है


बुवाई का सही समय कौन सा रहता है


अक्तूबर नवम्बर में इसके बीज की बुवाई करते हैं प्रति एकड़ एक किलो बीज की आवश्यकता होती हैं।नर्सरी तैयार कर कर इसकी रोपाई नवम्बर मध्य में की जाती है। छिड़काव विधि से चार किलो बीज पर्याप्त होता है। 50 ×30 सेमी के अन्तराल में पौधों का रोपण किया जाता हैं।

 कौन सा खाद डालना चाहिए


गोबर की सड़ी गली 3 से 4 ट्रेक्टर ट्राली या वर्मीकम्पोस्ट खाद 3 टन प्रति एकड़ देना चाहिए।



सिंचाई कब कब करना चाहिए


पहली सिचाई रोपड़ करने के तुरंत बाद करना होता है फिर 15 से 20 दिन के अंतराल में पानी देना चाहिए  3 पानी में फसल तैयार हो जाता हैं।

इस फसल में लगने वाले रोग


अब तक इसमे किसी भी प्रकार के कीट पतंगों का प्रकोप होते नहीं देखा गया है।अतः कोई भी रोग नही होता हैं।


फूलों की तुड़ाई कब करते हैं


फूलों की पहली तुड़ाई पौध रोपड़ करने के 60से 70 दिन में किया जाता हैं, इसके बाद हर 15 दिनों करते हैं पाचवी छठवीं तुड़ाई बीजों के लिए करना चाहिए।

उपज कितना प्राप्त होता हैं


इसके फूलों का उत्पादन प्रति एकड़ 35000किलो लगभग होता है तेल 4 से 5 लीटर होता है।


आय व्यय कितना होता है


कैमोमाइल की फूलो का रेट कम ज्यादा होते हैं है फिर भी 250 से 400 रुपये के बीच रहता है इसके तेल 25000 हजार रुपये से 45000 हजार रुपये लीटर बिकता हैं। सब खर्च काटकर शुद्ध आमदनी के रूप में 60 हजार  70 हजार रुपये मिल जाता है।


तीन महीने की फसल हैं


कैमोमिल की फसल मुख्य रूप से रबी की फसल है। विभिन्न सौंदर्य उत्पादों में प्रयोग होने के कारण बाजार में इसकी बेहद मांग है। इसमें पानी की खपत काफी कम होती है। छत्तीसगढ़ राज्य में कई तहसील में पानी की कमी है। यहां के लिए कैमोमिल की खेती एकदम अनुकूल हैं।

परंपरागत खेती की अपेक्षा इसमें लागत काफी कम लगती है और मुनाफा भी कई गुना ज्यादा मिल जाता है। किशोर ने इसकी खेती दस डिसमिस में शुरू की थी अब एकड़ में कैमोमिल की खेती कर रहे हैं।

सी एन आई न्यूज़ बेमेतरा छत्तीसगढ़ देव यादव की खबर मो 9098647395

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