पत्रकारों पर फर्जी एफआईआर लगाकर प्रताड़ित करना गलत।सूरज ब्रम्हे
*देश मे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता है ! पत्रकारिता किसी भी रूप मे हो सकता है ! इसका मुख्य उद्देश्य मानव समाज मे चल रहे गतिविधियो क़ो परोसना है ! समाचार सकारात्मक भी हो सकते है और नकारात्मक भी , यू कहाँ जाये तो पत्रकार आईना दिखाने का काम करता है ! यह अपने कार्य के प्रति स्वतंत्र होता है ! बात करे हम बालाघाट जिले की तो यहा कुछ वर्षो से लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ क़ो भ्रष्ट प्रशासन और अपराधी प्रवृत्ति के जनप्रतिनिधियो ने जकड़ रखा है , पत्रकारिता की स्वतंत्रता छीनने का प्रयास किया जा रहा है ! सच लिखने वाले पत्रकारो क़ो खूब निशाना बनाया जा रहा है ! और वो इसलिये हो रहा है , क्योकि तेज तर्रार कलम की धार से अच्छे अच्छो की फटी पड़ी है ! आईने मे खुद की शक्ल देखकर बौखला रहे है ! जनता के बीच अपना विश्वास खो रहे ! इन्ही सब कारणो से लोग अपनी गलती सुधारने के बजाय , पत्रकारो क़ो ही निशाना बनाने मे लगे है ! यहा देखा जा रहा है , की सच लिखने वाले ऐसे पत्रकारो को न तो कानून साथ दे रहा है और न ही न्यायपालिका साथ दे रहा है , मतलब सच लिखना एक सजा बन गया है ! न्यू इंडिया नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूरज ब्रम्हे ने बताया कि ऐसा ही हालिया मामला बालाघाट जिले मे बिरसा तहसील के मलांजखंड थाने मे कारित हुआ है , जहाँ पत्रकारो क़ो जबरन षडयंत्र पूर्वक निशाना साधते हुवे , लूटपाट वाले मामले मे फ़र्जी फंसाया गया है !यहां जानकारी अनुसार अवगत करा दे , की छत्तीसगढ़ के व्यक्ति का लेनदेन किसी अन्य व्यक्ति से था , जहाँ पत्रकार और लैब टेक्निशियन का संबंध दूर दूर तक नही था ! सामान्य दिनचर्या की तरह उस दिन भी एक साथ सब मिल गये , उस बीच लेन देन वाले व्यक्ति भी पहुँचे थे , लेनदेन वाले व्यक्ति के बीच पैसो क़ो लेकर कुछ बाते हुई , जिसमे कर्जा लिया छत्तीसगढ़ का व्यक्ति पैसे नही देने की नीयत से ,व्यवहार करने लगा फिर स्वयं बाद मे स्टाम्प लिखकर भी दिया ! मामला शांत होने के बाद , कुछ जयचंदो क़ो मौका मिल गया ! उनकी पत्रकारो से फटी पड़ी थी ! क्योकि एक के बाद एक समाचार से भ्रष्ट कारनामे प्रकाश मे लाये जा रहे थे ! इसलिये मौका परस्त लोगो क़ो मौका मिल गया , पत्रकारो के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाने का ! फिर क्या था, वे लोग छत्तीसगढ़ के व्यक्ति क़ो जबरन बहलाफुसलाकर झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दिया गया ,रिपोर्ट के पूर्व भी पुलिस के द्वारा दोनो पक्षो क़ो सुना जाता है , बयानबाजी होती है , लेकिन मलांजखंड की पुलिस भी ऐसा नही की ! यह भी बताया जाता है की , इस मामले पर प्रदेश स्तर की खूब नेतागिरी भी चली ! विडम्बना है हमारे देश की , यहा सच बोलना और लिखना गुनाह माना गया है , और चापलूस जैसी बातो क़ो उच्च श्रेणी का दर्जा दिया गया है ! लेकिन यहा भ्रष्ट प्रशासन और अपराधी प्रवृत्ति के लोगो को बता दे की , पत्रकार अपनी सुरक्षा के लिये खुद लड़ा है और लड़ते रहेगा , लेकिन अपना आत्मसम्मान नहीं गिरने देगा , किसी के डर की वजह से , अपनी कलम कभी नही रोकेगा ! हम पहले भी सच लिखकर क्रांति लाये है , और आज़ भी सच लिखकर क्रांति लाएंगे , पहले परायों से लड़े है , और आज़ अपनो से ही लड़ना है , जो आस्तीन का सांप है , और रह रह कर फन उठाते है ! ऐसे कचरों क़ो एक दिन कलम की ताकत साफ कर बालाघाट जिले मे नई क्रांति लाएगी !*


















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