हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर भोथली तहसील छुईखदान | वनांचल क्षेत्र के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ही जंगल के दुर्गम क्षेत्रों मैं घर घर जाकर बीपी एवं शुगर जांच किया गया है। और गांव के लोगों को बीपी से होने वाले तकलीफों के बारे में अवगत कराया गया | हाइपरटेंशन के अधिकांश मरीजों का रक्तचाप नियमित जांच के अभाव में अनियंत्रित बना रहता है और हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का कारण बनता है। हार्ट अटैक के 10 में से 7 मरीज हाईपरटेंशन के शिकार होते हैं। यही नहीं स्ट्रोक के 10 में से 8 मरीज भी हाईपरटेंशन से ग्रसित होते हैं। हाइपरटेंशन को हल्के में लेना मुसीबत का कारण बन सकता है हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप के कारणों का हालांकि ठीक-ठीक पता नहीं है पर रोगियों को दो धाराओं में बांटा जा सकता है। गलत खान-पान, दोषपूर्ण जीवनशैली, बढ़ती उम्र, मोटापा आदि इसके प्राथमिक कारण हैं। 50 से अधिक उम्र के लोगों में यह आम है। हाइपरटेंशन की दूसरी वजह कोई बीमारी या औषधि हो सकती है। सामान्य तौर पर अधिक नमक का सेवन, आरामतलब जीवनशैली, धूम्रपान, मोटापा, शराब और तनाव को इसका कारण माना जाता है।
रक्तचाप को यदि नियंत्रण में नहीं रखा जाए तो यह फेफड़ों में पानी भरने, नजर कमजोर होने, किडनी के क्षतिग्रस्त होने, याददाश्त के नुकसान के साथ ही लकवा के रूप में भी सामने आ सकता है।
हाइपरटेंशन के आरंभिक लक्षण
सिर में दर्द, सांस फूलना, नाक से खून आना, घबराहट महसूस होना तथा गर्दन या सिर में हृदय के स्पंदन को महसूस करना आदि शामिल है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लें। चिकित्सक के नियमित सम्पर्क में रहें तथा उनके बताए अनुसार ही औषधि का सेवन करें। सी. एच. ओ हेमंत कुमार साहू
*सीएनआई न्यूज़ खैरागढ़ से सोमेश कुमार की रिपोर्ट*


















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