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Sunday, May 29, 2022

रामाश्रम सत्संग मथूरा के तत्वाधान में दो द्विविसिय आंतरिक सत्संग समारोह बकरकटटा संपन्न ।


रामाश्रम सत्संग मथूरा के तत्वाधान में दो द्विविसिय आंतरिक सत्संग समारोह बकरकटटा संपन्न ।

सी एन आई न्यूज साल्हेवारा से चन्द्रभूषण यदु की रिपोर्ट ।

साल्हेवारा/रामपुर - 28 मई शाम एवं 29 मई सुबह ग्राम बकरकटटा में रामाश्रम सत्संग के तत्वाधान में दो द्विविसिय आंतरिक सत्संग समारोह पुर्व सरपंच स्व: मनबोध पटेल के निवास में भजन ध्यान प्रवचन शिविर आयोजित की गई ।


  जिसमें मुख्य आचार्य देवा साहु  के सानिध्य में साधकों ने सत्संग लाभ लिये ।श्री देवा साहु ने उपस्थित साधकों को सत्संग ध्यान प्रवचन के संबध में विस्तृत जानकारी देते हुये नित प्रति सुबह शाम 20 मिनट निर्धारित समय पर ध्यान की क्रिया करने से मन की मलीन विचार पर काबु पाते हुये मन को स्वच्छ व निर्मल बनाते हुये मन पर अधिकार करके एकाग्रता किया जा सकता है ।जब तक मन निर्मल नही होगा हमारे विचार शुद्ध नही हो सकता हमारे सामने तीन प्रवृत्ति मुख्य रुप से गुजरती है जिसे हम अपने जीवन में आत्मसात करतें हे प्रथम प्रवृत्ति में निवृति दुसरा निवृति में प्रवृत्ति तीसरा प्रवृत्ति में निवृति और निवृति में प्रवृति का उद्देश्य को समझाते हुये कहा कि पहले हमें सुख सुविधा खुब मिलती है पूरा विशाल जगह हमें स्वतंत्र रुप में चलने में मार्गदर्शन कराती है करने ना करने की सभी काम करते जाते है जो आगे चलकर संकीर्ण कंटीली राह में ले जाकर फंसाती है जिससे निकलने की कोई राह नही होती सभी दरवाजे बंद हो जाते है और हम दुख अवसाद फंस जाते है दुसरा यही रास्ता शूरु में बड़ी संकीर्ण कंटीली होती है जो भारी दुख कष्ट से थक हार कर मुकाबिला करते हुये आगे बड़ती है तो रास्ता का द्वार खुलता जाता है जिससे हम आगे बड़ते जाते है और हमारा राह आसान हो जाता है हम जीने की कला सीख लेते है यह हमारे कर्मो का फल है जो जैसा कर्म वैसा फल देता है यह रामाश्रम सत्संग के गुरुजनों ने इसे साधकों के लिये सहज सरल साधन बताया है जो प्रतिदिन 20 से25 मिनट ध्यान की क्रिया से अपने जीवन में आमूलचूल परिवर्तन देख सकतें है ईश्वर एक शक्ति पावर है जो साधक को शक्तिशाली बनाकर सुखमय जीवन जीने योग्य बनाता है रामाश्रम सत्संग एक ऐसा सत्संग है जो इस कलिकाल में मनुष्य को घर परिवार में रहकर आसानी से ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर करता है रामाश्रम सत्संग के गुरुजनों द्वारा विभिन्न  संकलन अध्यात्मिक  पुस्तकों भंडार स्टाल में उपलब्ध रहा जिसके बारे में बताया गया कि यह एक ऐसा पुस्तक है आप इसमे से किसी भी पुस्तक को खोल कर पढ़ ले आपके सारे समस्यायों का समाधान मिल जाता है स्वध्याय पर अधिक जोर दिया गया सुबह शाम किसी भी आध्यात्मिक पुस्तकों को अवश्य पढ़े अपने जीवन में उतारे लाभ जरुर मिलेगी इसके साथ ही सत्संग की प्रमुख ध्यान योग साधन को कैसे करे इसके संबध में सभी को एक सहज आसन में बिना हिले डुले 30 मिनट तक बैठे धीरे से नेत्र बंद करे और ऐसा देखे की हमारे सामने हमारा इष्ट या गुरु उपस्थित है उनके हृदय से प्रकाश निकल कर हमारे हृदय में प्रवेश कर रही है उस प्रकाश से हम प्रकाशित होते जा रहे है हमारा रोम रोम प्रकाश से लय होते जा रहा है जब मन इधर उधर कहीं चली जाये पुन: इसी ध्यान पर लाने का प्रयत्न करते रहे सत्संग की दो प्रार्थनायें होगी प्रार्थना समाप्त हो जायेगी ध्यान चलता रहेगा जब ऊपर से आदेश हो तब हम ध्यान भंग करे आंखे खोले यह साधना करते है यही मुख्य है इसे कोई भी कर सकता है ऐसे  सत्संग आज संसार में दुर्लभ है जो आप सबके लिये चलती फिरती प्रयाग राज बकरकटटा में पहुँच कर स्नान करा रही है आप सब इसका लाभ ले ।

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