कटघोरा में भी बुलडोजर चलाने की आवश्यकता : कांग्रेस नेता ने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा अतिक्रमण कर कांप्लेक्स निर्माण किया।
*कोरबा-* कटघोरा शहीद वीरनारायण चौक से 50 मीटर दूर मुख्य मार्ग में जनपद पंचायत की कई डिसमिल जमीन थी, जो कांजी हाउस एवं अन्य विकास कार्यों के लिए आरक्षित थी। खाली जमीन में बकायदा प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए जमीन आरक्षित है का बोर्ड भी सालों से लगा था,इस भूमि पर कांग्रेसियों की गिद्ध नज़रें पहले से ही लगी थी, और किसी तरह इस जमीन को हड़पने की साजिश रची गई और इस पर वे सफल भी हुए,
नवनिर्मित यह कांप्लेक्स कटघोरा निवासी एक दिग्गज कांग्रेस नेता की है। जिसने विवाद से बचने के लिए आचार संहिता का समय चुना और दिन रात एक कर सैंकड़ों मजदूरों को काम में लगाया, ताकि आचार संहिता खत्म होते ही इसका काम पूर्ण हो जाए, कोई भी विवाद न कर सके। सरकारी तंत्र ने जनपद पंचायत कटघोरा की जमीन को किस दबाव में आकर कांग्रेस नेताओं को औने-पौने दाम में रजिस्ट्री कराया,
यह तो कानून का पालन करने वाले अधिकारी और कांग्रेस नेता जाने। लेकिन सरकारी योजना के लिए आरक्षित इस जमीन को निजी व्यक्ति को सौंपने में पूर्व विधायक पुरूषोत्तम कंवर का हाथ है, नहीं तो जनपद पंचायत की जमीन को बचाने वे जरूर लड़ते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिससे साफ जाहिर है की विधान सभा कटघोरा में किस तरह भ्रष्टाचार हुआ है।
कांग्रेस नेता की अवैध निर्माण शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा पर, न तो भूमि का डायवर्शन किया गया है, निर्माण के लिए नगर पालिका परिषद कटघोरा से अनुमति भी नही लिया गया है, जनपद पंचायत से भी noc नही लिया गया, यह भूमि पूर्ण रूप से अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य कराया गया है, जिसमें तत्कालीन तहसीलदार रोहित कुमार सिंह, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर प्रभारी सीईओ संजय मरकाम, अपर कलेक्टर नरोजी, कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल के द्वारा जानकारी होते हुए भी ,जांच के आदेश दिया गया, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी कौशल तेंदुलकर को दिया गया , जिनके द्वारा विलंब होने पर अपर कलेक्टर नरोजी को सौंपा गया, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर संजय मरकाम प्रभारी सीईओ कटघोरा के द्वारा जनपद पंचायत कटघोरा की भूमि को अधिकृत रूप से श्री हरीशचंद्र कश्यप सहायक ग्रेड -3 को अधिकृत किया गया,जबकि कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सेवारत थे ,इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद कटघोरा अध्यक्ष, एवम जनपद अध्यक्ष कटघोरा श्रीमती लता मुकेश कंवर की मौन सहमति रही है, यदि गलत कार्य अवैध निर्माण का विरोध करते तो निर्माण होना संभव नही था, तत्कालीन तहसीलदार लहरे ने मौके पर निर्माण कार्य रोक लगाने के लिए स्टे लगाया एवम सभी सामग्री को जप्त करने का आदेश आर.आई. ,पटवारी , और थाना प्रभारी को जप्त का आदेश दिया था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार होने से कोई कार्यवाही नही हुई ,वर्तमान सत्ता परिवर्तन होने से छेत्र वासियों को उम्मीद है की यह अवैध अतिक्रमण कर शासकीय भूमि पर कांप्लेक्स निर्माण हटाया जाना बुलडोजर चलना चाहिए।
सी एन आई न्यूज कोरबा छत्तीसगढ से सुनील दास महंत की रिपोर्ट।


















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