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Monday, December 16, 2024

नही रहे मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन

 नही रहे मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) - भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक और तबले को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले दुनियां के उत्कृष्ट संगीतकारों में से एक मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन (73 वर्षीय) ने आज दुनियां को अलविदा कह दिया। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अस्पताल में ईलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली , उन्हें ह्रदय संबंधी समस्याओं की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे लगभग पन्द्रह दिनों से अस्पताल में भर्ती थे लेकिन बाद में उनकी तबियत और बिगड़ने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। जाकिर हुसैन के निधन पर अमिताभ बच्चन , रणवीर सिंह , करीना कपूर खान , सोनाली बेंद्रे सहित कई अन्य हस्तियों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह , रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित कई राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त किया और महान तबला वादक को श्रद्धांजलि दी। बताते चलें 09 मार्च 1951 को मुंबई में जन्मे उस्ताद जाकिर हुसैन के पिता का नाम उस्ताद अल्लारक्खा कुरैशी और मां का नाम बावी बेगम था। उस्ताद अल्लारक्खा अपने समय के बेहद प्रसिद्ध तबला वादक थे , उन्होंने ही जाकिर को संगीत की शुरुआती तालीम दी थी।उस्ताद जाकिर हुसैन की शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज ग्यारह वर्ष की उम्र में अमेरिका में पहला कॉन्सर्ट किया। उन्होंने ना सिर्फ अपने पिता उस्ताद अल्ला रक्खा खां की पंजाब घराने (पंजाब बाज) की विरासत को आगे बढ़ाया , बल्कि तबले के शास्त्रीय वादन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ले गये। उस्ताद जाकिर हुसैन तबले को हमेशा आम लोगों से जोड़ने की कोशिश करते थे। यही वजह थी कि शास्त्रीय विधा में प्रस्तुतियों के दौरान बीच-बीच में वे अपने तबले से कभी डमरू , कभी शंख तो कभी बारिश की बूंदों जैसी अलग-अलग तरह की ध्वनियां निकालकर सुनाते थे। जाकिर हुसैन की प्रारंभिक शिक्षा मुम्बई के माहिम स्थित सेंट माइकल स्कूल से हुई थी और उन्होंने ग्रेजुएशन मुम्बई के ही सेंट जेवियर्स कॉलेज से किया था। वर्ष 1973 में उन्होंने अपना पहला एल्बम 'लिविंग इन द मटेरियल वर्ल्ड' लॉन्च किया था। अपने छह दशक के लम्बे केरियर में संगीतकार जाकिर हुसैन ने कई प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया। वर्ष 1978 में जाकिर हुसैन ने कत्थक नृत्यांगना एंटोनिया मिनीकोला से शादी की थी ,  उनकी दो बेटियां अनीसा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी हैं। वर्ष 1983 में जाकिर हुसैन ने फिल्म 'हीट एंड डस्ट' से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा। इसके बाद वर्ष 1988 में 'द परफेक्ट मर्डर' , वर्ष 1992 में 'मिस बैटीज चिल्डर्स' और वर्ष 1998 में 'साज' फिल्म में भी उन्होंने अभिनय किया। उस्ताद जाकिर हुसैन को वर्ष 2023 में पद्म विभूषण , वर्ष 1988 में पद्मश्री , वर्ष 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष 2009 में पहला ग्रैमी अवॉर्ड मिला था और वर्ष 2024 में उन्होंने तीन  अलग-अलग एल्बम के लिये तीन ग्रैमी भी जीते ,  इस तरह जाकिर हुसैन ने कुल चार ग्रैमी अवॉर्ड अपने नाम किये थे।


सुपुर्द-ए खाक़


विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में अंतिम सांस लेने वाले तबला वादक जाकिर हुसैन को भारत नही लाया जायेगा और संभवत: बुधवार को उन्हें सैन फ़्रांसिस्को में ही सुपुर्द-ए खाक़ किया जायेगा। सूत्रों के अनुसार जाकिर हुसैन ने अपनी इटैलियन पत्नी एंटोनिआ मिन्नेकोला से कहा था कि वे हमेशा उन्हीं के साथ रहना चाहते हैं और मरने के बाद भी वे उनके आसपास ही रहना चाहेंगे , इस तरह से उन्होंने अमेरिका में ही सुपर्दे-ए-ख़ाक किये जाने की ख्वाहिश जताई थी। जाकिर के भाई फ़ज़ल कुरैशी भारत से अमेरिका पहुंच गये हैं और बहन खुर्शीद औलिया भी लंदन से अमेरिका के लिये रवाना हो चुकी हैं।

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