Breaking

अपनी भाषा चुने

POPUP ADD

सी एन आई न्यूज़

सी एन आई न्यूज़ रिपोर्टर/ जिला ब्यूरो/ संवाददाता नियुक्ति कर रहा है - छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेशओडिशा, झारखण्ड, बिहार, महाराष्ट्राबंगाल, पंजाब, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटका, हिमाचल प्रदेश, वेस्ट बंगाल, एन सी आर दिल्ली, कोलकत्ता, राजस्थान, केरला, तमिलनाडु - इन राज्यों में - क्या आप सी एन आई न्यूज़ के साथ जुड़के कार्य करना चाहते होसी एन आई न्यूज़ (सेंट्रल न्यूज़ इंडिया) से जुड़ने के लिए हमसे संपर्क करे : हितेश मानिकपुरी - मो. नं. : 9516754504 ◘ मोहम्मद अज़हर हनफ़ी - मो. नं. : 7869203309 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ आशुतोष विश्वकर्मा - मो. नं. : 8839215630 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ शिकायत के लिए क्लिक करें - Click here ◘ फेसबुक  : cninews ◘ रजिस्ट्रेशन नं. : • Reg. No.: EN-ANMA/CG391732EC • Reg. No.: CG14D0018162 

Thursday, March 5, 2026

उचित समय पर करें शक्ति व सम्पत्ति का प्रयोग - स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज

 उचित समय पर करें शक्ति व सम्पत्ति का प्रयोग - स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


रायगढ़ - मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र को विपत्ति आने पर हनुमान ने भक्ति व शक्ति का परिचय दिया था। जबकि श्रीराम के वनवास काल को विपत्ति मानकर अनुज लक्ष्मण ने विपत्ति का बंटवारा लेकर सच्चे भाई का धर्म निभाया। आज की सांसारिक बंधनों में सम्पत्ति का बंटवारा लेकर भाई होने का पहचान बना रहे हैं। भाई की पहचान करना है तो विपत्ति काल में होती है , इसका ध्यान रखना चाहिये। 

                                              उक्त कथन कामदगिरि पीठाधीश्वर चित्रकट धाम के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज ने स्वामी शिवानंद विद्यापीठ व गौसेवा आश्रम भीखमपुरा में आयोजित पांच दिवसीय श्रीविष्णु यज्ञ एवं श्रीराम कथा के अंतिम सत्र के दौरान कहा। उन्होंने कहा कि रामचरित को जानने के लिये रामायण का अध्ययन जरूरी है। लंका काण्ड प्रसंग के लक्ष्मण शक्ति भेद कथा सुनाते हुये कहा कि लक्ष्मण को मुर्छां अवस्था देख राम द्रवित होकर विलाप कर रहे हैं। उन्हें इस अवस्था में देखकर हनुमान ने संजीवनी बूटी लाने की भक्ति दिखाई , उसके बाद फिर अपनी शक्ति का प्रयोग किया। मनुष्य आज के समय में शक्ति व सम्पत्ति का दिखावा कर अपना अस्तित्व खत्म कर दे रहे हैं। इन दोनों चीजों को उचित समय आने पर प्रयोग करना चाहिये , तभी शक्ति व सम्पत्ति सार्थक होगा अन्यथा अस्तित्व खत्म हो जायेगा। भक्ति की श्रृखंला समाप्त नहीं होता है , भक्ति ही अमृत है। राम नाम जाप कर अमरत्व को प्राप्त किया जा सकता है। राम नाम आपको जगा देता है और अंतकाल में राम नाम ही बेड़ा पार करायेगा। कथा प्रांभ होने के पहले विप्र जनों ने मंत्रोच्चारण कर पादुका पूजन की और कथा समापन पर श्री रामायण की मंगलमय आरती की गईं।

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Hz Add

Post Top Ad