प्रीतम मरकाम के आकस्मिक निधन से वनांचल साल्हेवारा स्तब्ध, क्षेत्र में शोक की लहर
सरल, सत्यप्रिय और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे प्रीतम मरकाम 15 मार्च को मुक्तिधाम साल्हेवारा में हुआ अंतिम संस्कार
खैरागढ़।
वनांचल साल्हेवारा के मिलनसार एवं सज्जन व्यक्तित्व के धनी प्रीतम मरकाम के आकस्मिक निधन से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। उनके असामयिक निधन की खबर से साल्हेवारा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई और लोग स्तब्ध रह गए।
प्रीतम मरकाम, मंडल भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रहलाद मरकाम के अनुज तथा युवा नेता उमेश मरकाम के चाचा थे। उनका अंतिम संस्कार 15 मार्च को साल्हेवारा के मुक्तिधाम में पूरे विधि-विधान के साथ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन, मित्र, शुभचिंतक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित होकर उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
प्रीतम मरकाम का जीवन सादगी, सत्यनिष्ठा और सौहार्द का प्रतीक था। अपने लंबे जीवनकाल में उन्होंने कभी किसी से झगड़ा या विवाद नहीं किया। वे सत्यप्रिय, शांत स्वभाव और अपने काम से काम रखने वाले व्यक्ति थे। उनका व्यवहार अत्यंत विनम्र और मिलनसार था, जिसके कारण समाज में सभी वर्गों के लोगों के बीच उन्हें सम्मान और स्नेह प्राप्त था।
युवा अवस्था में उन्हें खेलकूद से विशेष लगाव था। वे कैरम, फुटबॉल और क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी रहे और अपने साथियों के बीच लोकप्रिय रहे। खेल भावना और मित्रता निभाने की उनकी आदत उन्हें सबका प्रिय बनाती थी।
उनके घनिष्ठ मित्र दिलोप शुक्ला ने भावुक होकर बताया कि वर्ष 1987से1990 के बीच सम्भवतः से ही तरुणाई के दिनों से उनकी मित्रता रही है। उनके साथ बिताए गए खेल और मित्रता के पल आज भी स्मृतियों में ताजा हैं। उनका सहज स्वभाव, सादगी और मिलनसार व्यक्तित्व सदैव याद किया जाएगा।
प्रीतम मरकाम के निधन से क्षेत्र ने एक सरल, सज्जन और नेकदिल व्यक्ति को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक समाज को महसूस होती रहेगी। उनके प्रति क्षेत्रवासियों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।


















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