छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण को लेकर जनसैलाब, हर तहसील में सौंपे गए ज्ञापन
‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत सर्व हिंदू समाज का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, कठोर कानून और अलग मंत्रालय की मांग तेज
बिलाईगढ़।
छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण और संवर्धन को लेकर एक व्यापक जन-अभियान ने जोर पकड़ लिया है। ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के बैनर तले आज प्रदेश की लगभग हर तहसील में सर्व हिंदू समाज के नेतृत्व में महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
बिलाईगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों ने एसडीएम कार्यालय बिलाईगढ़ में एकत्र होकर अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और प्रशासन के माध्यम से अपनी मांगें शासन तक पहुंचाईं।
यह आंदोलन केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डोंगरगढ़ से लेकर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले सहित पूरे प्रदेश में एक साथ इसकी गूंज सुनाई दी। तहसील स्तर पर तहसीलदार और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर गौवंश संरक्षण को राज्य की प्राथमिकता बनाने की मांग की गई।
समाज की एकजुटता बनी ताकत
इस अभियान में सर्व हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और संत समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन भूमि है, जहां गौवंश की उपेक्षा सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत है।
ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
गंभीर गिरावट का दावा: आजादी के समय प्रति व्यक्ति 10 गौवंश का अनुपात घटकर 10 व्यक्तियों पर 1 रह जाने की बात कही गई।
कठोर कानून की मांग: गौ-वध पर पूर्ण प्रतिबंध और तस्करी रोकने के लिए सख्त कानून लागू करने की मांग।
अलग मंत्रालय की मांग: गौ-सेवा एवं संरक्षण के लिए पृथक मंत्रालय गठन का सुझाव।
संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 48 में संशोधन कर ‘केंद्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम’ लागू करने की अपील।
सड़क सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि गौवंश ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। साथ ही, सड़कों पर आवारा घूम रहे पशुओं से बढ़ती दुर्घटनाओं और शहरी क्षेत्रों में पॉलिथीन खाने से हो रही मौतों पर गंभीर चिंता जताई गई। इसके समाधान के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की मांग की गई।
क्या बोले अभियान संयोजक?
अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि, “आज प्रदेश की हर तहसील से एक ही आवाज उठी है। समाज अब चुप नहीं बैठेगा। सरकार को हमारी भावनाओं का सम्मान करते हुए गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”
अब आगे क्या?
प्रदेशभर में एक साथ सौंपे गए इन ज्ञापनों ने शासन-प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर मजबूती से आकर्षित किया है। अब राज्य सरकार और राजभवन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।



















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