जिला सिवनी मध्यप्रदेश
जातीय जनगणना - सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की आधारशिला
सी एन आई न्यूज सिवनी
लखनादौन, 21 अप्रैल 2026 |
लखनादौन के सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता, ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेज फेडरेशन के प्रदेश संयोजक तथा अखिल भारतीय तेली महासभा के विधिक सलाहकार उमेश गोल्हानी बंधु ने जातीय जनगणना के समर्थन में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी और आवश्यक माध्यम है।
उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के माध्यम से देश के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग की वास्तविक जनसंख्या का सटीक और प्रमाणिक आकलन संभव होगा। इससे नीति निर्माण अनुमान नहीं, बल्कि ठोस आंकड़ों के आधार पर किया जा सकेगा, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाएगा।
उन्होंने बताया कि जातीय जनगणना प्रतिनिधित्व और भागीदारी को संख्यानुपात के आधार पर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पंचायत से लेकर संसद तक, शासन के सभी स्तरों पर समाज के प्रत्येक वर्ग को उचित अवसर प्राप्त होगा, जिससे लोकतंत्र अधिक समावेशी और संतुलित बनेगा।
उमेश गोल्हानी बंधु ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता को सुदृढ़ करने के लिए भी जातीय जनगणना अत्यंत आवश्यक है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन वर्गों को वास्तविक लाभ प्राप्त हो रहा है और किन वर्गों तक अवसर अभी भी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाए हैं, जिससे नीतियों में आवश्यक सुधार और संतुलन स्थापित किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक योजनाओं को अधिक लक्षित, प्रभावी एवं परिणामकारी बनाने में भी जातीय जनगणना सहायक सिद्ध होगी। इससे सरकार को समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने और उनके अनुरूप योजनाएं तैयार करने में सुविधा मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से ओबीसी वर्ग सहित अनेक सामाजिक समूहों की अद्यतन और आधिकारिक जनसंख्या संबंधी जानकारी का अभाव रहा है, जिसके कारण नीति निर्माण में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती रही है। जातीय जनगणना इस कमी को दूर कर विकास की प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बनाएगी।
अंत में उन्होंने सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों एवं जागरूक नागरिकों से आह्वान किया कि वे जातीय जनगणना के समर्थन में आगे आएं, ताकि सामाजिक न्याय, समान अवसर और संख्यानुपात आधारित भागीदारी को सशक्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना ही वास्तविक हक और अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कुंजी सिद्ध हो सकती है।
जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट


















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