विश्व बंजारा दिवस आज-बंजारा समाज में विश्व की प्राचीनतम संस्कृति की झलक दिखाई देती है,इस संस्कृति की पहचान की रक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना और भेदभाव दूर करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
आज 8 अप्रैल को विश्व बंजारा दिवस मनाया जाएगा।
आईबीआरओ के संस्थापक डी. रामा नाईक कहते हैं कि पिछले एक दशक से पूरे भारत में आठ अप्रैल को विश्व बंजारा दिवस सार्थक और प्रतीकात्मक रूप से मनाया जा रहा है, जो देशभर में फैले बंजारा समुदाय के बीच एकता, भाईचारे को सुदृढ़ करने तथा उनकी समृद्ध भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं विकास को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।
बंजारा समुदाय का यूरोप के विभिन्न देशों में फैले रोमा समुदाय के साथ गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। वर्ष 1990 से विश्वभर के रोमा समुदाय 8 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय रोमा दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं, जिसका उद्देश्य अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना, अपनी समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाना तथा भेदभाव और उपेक्षा के विरुद्ध आवाज उठाना है। अपनी विशिष्ट पहचान और एकता के प्रतीक के रूप में रोमा समुदाय ने अपना अलग ध्वज और गान भी अपनाया है, जो उनकी सामूहिक शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है।
रोमा, जिन्हें बंजारा समुदाय की जड़ों के रूप में माना जाता है, भारत के बंजारों के साथ गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रखते हैं। बंजारा भारत के सबसे बड़े मूलनिवासी समुदायों में से एक हैं, जिनकी जनसंख्या दस करोड़ से अधिक है। इसके बावजूद, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति आज भी विदेशों में बसे रोमा समुदाय के समान ही अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इतिहास में आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी जीवन जीने वाले बंजारों को ब्रिटिश शासन के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत गंभीर व्यवधानों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें घुमंतू जीवन जीने के लिए मजबूर किया और उनके पारंपरिक व्यवसाय, आजीविका तथा भूमि, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान जैसे मूल अधिकारों से वंचित कर दिया।
ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, बंजारा समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में अद्भुत दृढ़ता का परिचय दिया है।" विश्व बंजारा दिवस" हमारे पूर्वजों के संघर्ष और बलिदानों को स्मरण करने तथा समुदाय के पुनर्निर्माण और विकास के लिए सामूहिक संकल्प को पुनः दृढ़ करने का अवसर प्रदान करता है। यह वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए एकता, आत्ममंथन और सक्रिय प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
रोमा और बंजारा समुदायों के बीच गहरे संबंध को पहचानते हुए,एआईबीएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री डी. रामा नायक द्वारा यूरोप के रोमा समुदाय से संपर्क स्थापित करने के बाद वर्ष 2016 में भारत में पहली बार "विश्व रोमा–बंजारा दिवस" के आयोजन की पहल की। इस दिवस का आयोजन प्रारंभ में एक सरल किंतु प्रतीकात्मक पहल के रूप में हुआ—देश की नदियों और समुद्रों में पुष्प अर्पित करना तथा आपस में शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करना। समय के साथ, यह दिवस राष्ट्रीय सीमाओं से परे समुदायों की एकता और सामूहिक पहचान का एक सशक्त प्रतीक बन गया है।
इस पहल के परिणामस्वरूप "अंतरराष्ट्रीय बंजारा–रोमा संगठन" (IBRO) का गठन हुआ, जिसने वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ किया। वर्षों के दौरान कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में विभिन्न कार्यक्रम, संगोष्ठियां और सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय रोमा प्रतिनिधियों की भागीदारी ने साझा वैश्विक पहचान को और मजबूत किया।
समय के साथ, भारत में व्यापक जनस्वीकृति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस आयोजन को "विश्व बंजारा दिवस "के रूप में जाना जाने लगा, जबकि रोमा संबंध को सम्मानपूर्वक बनाए रखा गया। निरंतर प्रयास, समर्पण और स्पष्ट दृष्टिकोण के माध्यम से यह आंदोलन आज राष्ट्रीय स्तर पर एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है।
8 अप्रैल केवल उत्सव का दिन नहीं है और न ही यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं या राजनीतिक उद्देश्यों का मंच है। यह रोमा–बंजारा समुदाय की साझा विरासत को पुनः स्थापित करने का "संकल्प दिवस" है तथा इस समृद्ध धरोहर को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखने की एक गंभीर प्रतिज्ञा का दिन है।


















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