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Saturday, March 27, 2021

संयंत्र प्रबंधन द्वारा इस्पात भवन व्यापार योजना - 2021-2022 के सन्दर्भ में संयंत्र

 छत्तीसगढ़..


भिलाई..दिनांक.-25 मार्च.2021 

विगत दिनों संयंत्र प्रबंधन द्वारा इस्पात भवन व्यापार योजना - 2021-2022 के सन्दर्भ में संयंत्र


के प्रभारी निदेशक श्री अनिर्बन दासगुप्ता की अध्यक्षता में एक संचार कार्यशाला का आयोजन किया गया।


 उक्त बैठक में संयंत्र एवं उसके बंधक खदानों में कार्यरत श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था। उक्त कार्यशाला मेंप्रबंधन की ओर से वित्तीय वर्ष 2021-2022 में इस्पात संयंत्र के लिए निर्धारित की गयी विभिन्न लक्ष्यों की जानकारी दी गयी एवं इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए खदान से प्राप्त होनेवाले कच्चे माल ( लौह अयस्क लाइम स्टोन क्वार्ट्जाइट ) की उपलब्धता पर चर्चा की गयी।



तदुपरांत इन लक्ष्यों को हासिल करने हेतु उपस्थित श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों से विचार लिए गए। विचार विमर्श के दौरान सभी श्रम संगठनों ने जल्द से जल्द सम्मानजनक वेतन समझौता करने कार्यस्थल पर सुरक्षा बनाये रखने हेतु सुरक्षा के मानदंडों को सही तरीके से पालन करने क्रिटिकल एरिया में नियमित मैन पावर के कमी को आउट सोर्सिंग के बजाय नियमित कर्मियों के नियुक्ति से दूर करने कर्मियों के सुविधाओं में किये जा रहे विभिन्नकटौतियों को बंद करने तथा बंद सुविधाओं को जल्द से जल्द शुरू करने बीएसपी स्कूलों के किये जा रहे निजीकरण को बंद करने डेली रिवॉर्ड स्कीम शुरू करने और इंसेंटिव स्कीम में सुधार करने की मांग कीभारतीय मजदूर संघ की तरफ से उपस्थित प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि खदान कर्मियों ने विकट परिस्थितियों में भी कभी खदान के उत्पादन को प्रभावित नहीं होने दिया और निरंतर दिए गए लक्ष्यों को हासिल किया। 



वर्तमान परिस्थिति में प्रबंधन जिस तरह से प्रत्येक कार्यों को आउट सोर्सिंग करते हुए नियमित कर्मियों की संख्या में कमी कर रहा है उससे न केवल आने वाले समय में कई तरह की परेशानियां खड़ी होंगी बल्कि वर्तमान में कुछ जगहों पर इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिल भी रहा है। प्लांट मेंटेनेंस भारी वाहनों के मेंटनेंस जैसे कार्य जब तक नियमित कर्मियों के हाथ में रहे तब तक उत्पादन एवं उत्पादकता बनाये रखने में परेशानी नहीं हुई किन्तु जब से इन कार्यों को आउट सोर्सिंग कर दिया गया तब से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 


अतः मेंटनेंस कार्यों को आउट सोर्सिंग के बजाय प्रशिक्षितधनयमित कर्मियों से करना उचित होगा और इसके लिए अगर आवश्यकता हो तो नयी नियुक्ति हेतु प्रबंधन आवश्यक कार्य करे। 

इसके अलावा संघ ने ठेका श्रमिकों के शोषण का मुद्दा रखते हुए कहा कि आज खदान में उत्पादन के क्षेत्र में ठेका श्रमिक नियमित कर्मियों के साथ कन्धा से कन्धा मिला कर कार्य कर रहा है किन्तु उसे सरकार द्वारा तय किये गए न्यूनतम वेतन से वंचित रहना पड़ता है। 


इसके अलावा ठेकेदार द्वारा ठेका श्रमिकों को विभिन्न भत्तों से भी वंचित रखा जा रहा है। इनकी मांग करने पर ठेकदार द्वारा निविदा शर्तों में इनका जिक्र नहीं होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ लिया जाता है। जबकि वर्ष 2019 में खदान प्रबंधन द्वारा विभिन्न भत्तों को मिलकर ठेका की कॉस्टिंग निकलने एवं ठेका शर्तों में इनका स्पष्ट जिक्र करने हेतु आदेश भी निकला गया है किन्तु आज भी ऑपरेटिंग अथॉरिटी द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है।इसके अलावा संघ ने वर्तमान ठेका पद्धति एवं ठेकेदारों द्वारा कुछ अधिकारीयों के साथमिलकर भ्रष्टाचार करने के का मुद्दा रखते हुए कहा कि ठेकेदार द्वारा 20–30 प्रतिशत कम दर में कार्य ले लिया जाता है और उसके बाद जब न्यूनतम वेतन और अन्य भत्ता और सुविधा की बातकी जाती है तो अधिकारी भी ठेकेदार के तरफ से ही बात करते हुए कहते हैं कि बहुत कम रेटपर काम लिया गया है 


अतः न्यूनतम वेतन देना संभव नहीं है। इसके अलावा कुछ ठेकेदारअधिकारीयों के साथ मिलकर कंपनी के पैसे का बन्दर बाँट भी करते हैं और इसके लिए ठेकेदारऔर अधिकारी मिलकर मस्टर रोल में कम हाजिरी दर्शाते हैं लेकिन बिल में ठेका शर्तों केअनुसार पूरी हाजिरी दर्शाते हुए पूरा पैसा लेते हैं। मामलों को सबूत के साथ देने के बाद भीप्रबंधन द्वारा कोई कारवाई नहीं की जाती है जिससे ऐसा लगता है कि खदान प्रबंधन इसभ्रष्टाचार में शामिल है। इन भ्रष्टाचारों से कंपनी के लाभ पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसकाखामियाजा आज सभी नियमित एवं ठेका कर्मियों को उठाना पड़ रहा है।संघ के इन बातों का लगभग सभी श्रम संगठनों ने समर्थन करते हुए भ्रष्टाचार पर जल्द से जल्द अंकुश लगाने के मांग की जिसपर डायरेक्टर प्रभारी महोदय ने शीघ्र ही समुचित कारवाई करने की बात कही। साथ ही उन्होंने ठेका श्रमिकों के समस्याओं के निवारण हेतु सभी श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ शीघ्र ही एक और बैठक करने की बात कही। 


इसके अलावा उन्होंने राजहरा में आने वाले विभिन्न प्रोजेक्ट्स की भी जानकारी देते हुए कहा कि बीएसपी प्रबंधन राजहरा को उजड़ने नहीं देगा और निकट भविष्य में शीघ्र ही कई प्रोजेक्ट्सजैसे पेलेट प्लांट बेनिफिसिएशन प्लांट आदि शुरू किया जावेगा /

जिससे क्षेत्र में रोजगार केअवसर पैदा होंगे। इस कार्यशाला में संघ की तरफ से महामंत्री एमपीसिंग एवं सचिव लखनलाल चौधरी ने भागीदारी की।

एम.पी.सिंह महामंत्री खदान मजदूर संघ /


 सी .एन .आई .न्यूज़ के लिए ब्यूरो  रिपोर्ट

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