अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर -- देश के अन्य राज्यों के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी कोरोना के साथ साथ म्यूकोरमायकोसिस (ब्लैक फंगस)का खतरा बढ़ गया है। एम्स में पंद्रह मरीज के भर्ती होने और प्रदेश के अलग अलग जिलों में इसके मरीज मिलने की खबर के बाद छग सरकार ने इस बीमारी को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। ब्लैक फंगस एक दुर्लभ किस्म का गंभीर संक्रमण है। कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होकर लौटे मरीजों पर यह अटैक कर रहा है। इसके शिकार मरीजों के नाक से बदबूदार पानी आने लगता है , इसके बाद जब संक्रमण फैल जाता है तो नाक से खून आने लगता है और आंखों में सूजन आ जाती है। आंखों में सूजन के दौरान कई मरीजों की रोशनी पर भी प्रभाव पड़ा है। स्वास्थ विशेषज्ञों के अनुसार ब्लैक फंगस के लक्षणों में सिरदर्द , बुखार ,आंखों में दर्द , नाक बंद या साइनस और देखने की क्षमता पर आंशिक रूप से असर शामिल है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में ब्लैक फंगस के संक्रमण होने की जानकारी को गंभीरता से लिया है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में ब्लैक फंगस के उपचार के लिये सभी जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस का संक्रमण होने की खबर है। इसके रोकथाम के लिये पोसाकोनाजोल और एम्फोटेरसिन-बी औषधियों की आवश्यकता होती है , जिसकी नियमित और विधिवत् आपूर्ति किया जाना अतिआवश्यक है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में छत्तीसगढ़ के खाद्य एवं औषधि प्रशासन नियंत्रक ने सभी जिलों में पदस्थ औषधि निरीक्षकों को अपने जिलों में औषधि पोसाकोनाजोल और एम्फोटेरेसिन-बी (समस्त डोसेज फाॅर्म , टैबलेट , सीरप , इंजेक्शन एवं लाइपोसोमल इंजेक्शन) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये हैं।
सीएम भूपेश बघेल ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन नियंत्रक ने औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के भीतर समस्त होलसेलर , स्टाॅकिस्ट , सीएंडएफ से उक्त औषधियों की वर्तमान में उपलब्ध मात्रा की जानकारी प्रतिदिन प्राप्त करें। औषधि निरीक्षक अपने क्षेत्र के सभी औषधि प्रतिष्ठानों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करें।
क्या है ब्लैक फंगस ?
भारतीय चिकित्सा विज्ञान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक ब्लैक फंगस एक तरह का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। यह संक्रमण मस्तिष्क , फेफड़े और त्वचा पर भी असर कर रहा है। यह वातावरण में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देता है। खासकर यह बीमारी डायबिटीज और क्रानिकल बीमारी वालों के लिये खतरनाक है।इस बीमारी में कई के आंखों की रौशनी चली जाती है वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है। इस बीमारी से दो से तीन दिनों में ही हालात बेकाबू हो सकते हैं और अगर समय रहते इलाज ना मिले तो मरीज की जान भी चली जाती है। अभी तक फंगस के जितने भी पेशेंट सामने आये हैं लगभग सभी कोरोना पॉजिटिव रह चुके हैं।
कोरोना का इलाज करा कर घर लौटे लोगों पर ब्लैक फंगस ने अटैक किया है। कोरोना के इलाज के दौरान सभी मरीजों को हाई पॉवर स्टेराइड और टासिलिजूमैब इंजेक्शन दिया गया था। जिसकी वजह से मरीजों का शुगर लेबल तीन सौ से चार सौ तक पहुंच जाता है। यह स्थिति पहले से डायबिटीज की बीमारी झेल रहे मरीजों के लिये जानलेवा साबित होती है। इससे मरीजों की नाक और आंख में दिक्कत हो रही है। यह फंगल इंफेक्शन उन लोगों पर भी असर कर रहा है जो कोरोना की चपेट में आने से पहले ही किसी दूसरी बीमारी से ग्रस्त थे और उनका इलाज चल रहा था। इस कारण उनके शरीर की पर्यावरणीय रोगजनकों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे लोग जब अस्पताल में कोरोना के इलाज के लिये भर्ती होते हैं तो वहां के पर्यावरण में मौजूद फंगल उन्हें बहुत तेजी से संक्रमित करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के इलाज में उपयोग होने वाले स्टेरॉयड भी इस फंगल इंफेक्शन का कारण बन रहे हैं।
यह फंगस आम लोगों के भी साइनस में रहता है लेकिन सामान्यतय: शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता के चलते इसका कोई असर नही होता। अगरब्लैक फंगस के कोई भी लक्षण दिखे तो ऐसे अस्पताल जायें जहां नेत्र सर्जन , ईएटी , और न्यूरो के एक्सपर्ट डाक्टर हों , उनसे ही इस मामले में सलाह लें।
ब्लैक फंगस के प्रमुख लक्षण
खूनी उल्टी और मानसिक दशा में बदलाव , नाक का बंद हाेना मानों साइसन की समस्या हो , नाक के नजदीक भी सूजन आने लगती है।नाक से काले म्यूकस का डिस्चार्ज होना , मुंह के तालू पर काला निशान , दांत ढीले हो जाना , जबड़े में दिक्कत होना , तालू की हड्डी काली पड़ने लगती है। साफ ना दिखना या चीजें दो-दो दिखना और आंख में दर्द भी हो। थ्रॉम्बोसिस यानि कॉरोनरी आर्टरी में थक्का , नेक्रोसिस यानि किसी अंग का गलने लग जाना , आंख के नीचे दर्द व सूजन होना , मसूड़ाें में सूजन आना , यहां तक की उनमें पस तक पड़ने लगता है।


















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