लॉकडाउन में काम धंधा चौपट कालाबाजारी से बिगड़ा रसोई का बजट
सालेटेकरी।पिछले साल लगा लॉकडाउन का जख्म अभी भरा भी नही था कि अप्रैल 2021 से पुनः मध्यप्रदेश में लगा लॉक डाउन ने प्रदेशवासियों का कमर तोड़ कर रख दिया है।लॉकडाउन के नाम पर पिछले बार भी व्यापारियों ने जमकर मुनाफा खोरी किया इस वर्ष भी वही कहानी दोहराया जा रहा है जिस पर अंकुश लगाने वाला कोई नही है।सबसे ज्यादा आग खाद्य तेलों में लगी है जो 100-120 रुपया में मिलने वाला तेल आज 150-180 में मिल रहा है
जिस पर काबू पाना नितांत आवश्यक है।इस समय उन परिवारों को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है जो रोज कमाने खाने वाले है।कल्पना करिए उन लोगो की जो सुबह काम मे जाते थे और शाम को घर आते समय राशन लाते थे जिससे उनका परिवार चलता था।लेकिन आज समय एकदम उल्टा है।इंसान लॉक डाउन में फंस गया है जिससे निकल पाना बहुत मुश्किल है।सरकार ने 3 महीने का राशन मुफ्त में देने का वादा किया है।लेकिन उचित मूल्य की दुकानों में बहुत ही कम मात्रा में चावल पहुंचा है जिससे सेल्समैन को चावल वितरण करने में परेशानी हो रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार किराना व्यापारी अपनी दुकानें खोलकर जम कर मुनाफा कमा रहे हैं जिनपर प्रशासन भी मेहरबान नजर आ रहा है।तभी तो किराना व्यापारी लॉकडाउन व माल की कमी का बहाना बनाकर अनाप शनाप दामो में अपना सामान बेच रहे हैं।खाद्य तेल 150-180 रुपया प्रति लीटर,शक्कर 40 से 50 रुपया प्रति किलो,दाल 80 से 120 में बिक रही है।ऐसे में कैसे गुजारा होगा उन परिवारों का जो लॉकडाउन के चलते घरों में कैद होकर रह गए हैं।सरकार ने तीन महीने का राशन गरीब परिवारों को मुफ्त में देने को कहा है।लेकिन सच्चाई कुछ और है।जिसको समझ पाना शायद सरकार के बस की बात नही है।


















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