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Saturday, May 15, 2021

कोरोना पर विजय , फिर प्लाज्मा डोनेशन का जुनून

 

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 

पुणे  - इस वैश्विक कोरोना महामारी में एक ओर लोग जहां घरों में सुरक्षित रहकर  अपनी जान बचाने संघर्षरत हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की जान बचाने के लिये अपनी जान दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। आज के इस दौर में कोरोना वैक्‍सीन की तरह ही कोरोना मरीजों के लिये प्‍लाज्‍मा वरदान साबित हो रही है।

 कोरोना संक्रमण को मात दैने के बाद पुणे के एक शख्स अजय मुनोत ने पिछले नौ महीनें मे 14 बार प्लाज्मा दिया है। अब उन्‍हें ‘चलता फिरता प्‍लाज्‍मा बैंक’ कहा जाने लगा है। चौदह बार प्लाज्मा डोनेट कर इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड से सर्टिफिकेट पाने वाला अजय मुनोत (50वर्ष) मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे शहर का निवासी है जो कि स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट के तौर पर कार्य करते हैं।

पहले हुये हुये थे संक्रमित


अजय मुनोत जुलाई 2020 में कोरोना से संक्रमित हुये थे ,  इस दौरान वे एक कोविड-19 केयर सेंटर में भर्ती रहे। फिर जून में कोरोना को मात देने के 28 दिन बाद उन्होंने अपना पहला प्लाज्मा डोनेशन किया था। उसके बाद वे लगातार लोगों की मदद के लिये प्लाज्मा डोनेट कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक शरीर में एंटीबॉडी बनती रहेगी तब तक प्लाज्मा दान करता रहूंगा। अजय के करीबी मित्र और रिश्तेदार अब उन्हें प्लाज्मा बैंक के नाम से पुकारने लगे हैं। उनका कहना है कि जब वे कोरोना को मात देकर घर आये तो तमाम लगों को सोशल मीडिया पर प्लाज्मा के लिये गुहार लगाते देखा।

 इसके बाद उन्होंने पहला प्लाज्मा डोनेशन एक गरीब परिवार के लिये किया। अजय के प्लाज्मा दान से उस गरीब परिवार की मां की जान बचायी जा सकी। उन्हें प्लाज्मा डोनेशन से कोई दिक्कत नहीं हुई और जब तक एंटीबॉडी बनती रहेगी वे प्लाज्मा दान करते रहेंगे। अजय में प्लाज्मा दान देकर लोगों की मदद करने का ऐसा जब्जा है कि उन्होंने अभी तक कोरोना की वैक्सीन भी नहीं लगवायी है। वे कहते हैं कि अगर कोरोना वैक्सीन लगवा ली तो वे प्लाज्मा दान नहीं कर पायेंगे। इसी वजह से वह वैक्सीन नहीं लगवा रहे ताकि लोगों की मदद कर सकें। अजय के अनुसार वे संयुक्त परिवार से आते हैं , उनके परिवार में ग्यारह सदस्य हैं।

 सभी लोग उन्हें इस काम में सहयोग कर रहे हैं , उनकी पत्नी उनके खाने पीने का विशेष ध्यान रखती है। परिवार के सहयोग के बगैर वे इतना कुछ नहीं कर पाते। आज कोरोना महामारी के इस  दौर में लोगों को एक दूसरे के साथ ही जरुरत है। इसलिये वे अपने वीडियों और अनुभव के आधार पर लोगों को प्लाज्मा और रक्तदान करने के लिये  भी प्रेरित करते रहते हैं। 

मां से मिली प्रेरणा

अजय को प्लाज्मा डोनेट करने की यह प्रेरणा अपनी मां से मिली है। अजय कहते हैं, 'मेरी मां का ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव था , ऐसे ब्लड वालों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है। मेरी मां को अक्सर पुणे के आर्मी ऑफिस से ब्लड डोनेट करने के लिये कॉल आते थे। जब भी मेरी मां रक्तदान करने जाती थीं मैं उनके साथ जाता था। तब से मैंने प्रण किया कि मैं भी भविष्य में ऐसा ही करूंगा जिससे लोगों की जान बचाने में सहयोग कर सकूं। उनका कहना है कि जब भगवान ने मुझे मौका दिया है तो मैं पीछे कैसे हट सकता हूं ?

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