महासमुंद 08 जुलाई 2021/ डिपार्टमेंटऑफ माइक्रोबायोलॉजी गवर्नमेंट माता कर्मा कन्या महाविद्यालय महासमुंद एवं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च पुणे के संयुक्त तत्वाधान में 8 जुलाई 2021 को राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया
जिसका विषय How to read scientific literature and introduction to manav the human Atlas initiative था इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में पूरे भारत के विभिन्न राज्यों से 225 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें विज्ञान के स्नातक स्नातकोत्तर शोध छात्रों के साथ शिक्षक एवं प्राध्यापक भी जुड़ें। स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रमेश कुमार देवांगन ने इस वेबीनार के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की परियोजनाओं से दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों में भी मौजूद छात्रों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इस कार्यक्रम का संचालन वेबीनार की संयोजक एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ स्वेतलाना नागल ने किया एवं उन्होंने अपने महाविद्यालय एवं महासमुंद जिले के छात्रों को इस परियोजना से जुड़ने एवं इसके प्रमुख उद्देश्य को अवगत कराते हुए इसमें आगे आने को प्रेरित किया।
इस कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता डा अनुपमा हर्षल वडालीकर, कंसलटेंट प्रोजेक्ट मैनेजर आईआईएसआर पुणे थी जिन्होंने अपने वक्तव्य में सभी प्रतिभागियों को भारत सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना मानव के उद्देश्यों से परिचित कराया जिसके अंतर्गत भारतवर्ष के वैज्ञानिक रूप से साक्षर जनसंख्या जिसमें स्नातक स्नातकोत्तर पीएचडी उपाधि वाले छात्रों को प्रशिक्षित करना ताकि वर्तमान समय में विश्व भर के डेटाबेस में उपलब्ध मानव शरीर से संबंधित शोध पत्रों में निहित जानकारी का उपयोग कर आने वाली विकास एवं शोध परियोजनाओं के लिए खांचा तैयार करना है साथ ही भारतीय छात्रों को नवीनतम डाटा माइनिंग डाटा क्यूरेशन आदि तकनीको मैं प्रशिक्षित करना और विज्ञान के क्षेत्र में मानव संसाधन का विकास करना है।
डॉक्टर अनुपमा ने अपने वक्तव्य में स्नातक स्नातकोत्तर छात्रों को किस प्रकार सोशल साइट्स में उपलब्ध डाटा के स्थान पर पबमेड एवं अन्य विश्वस्त डेटाबेस का उपयोग एवं महत्व भी समझाया और किस प्रकार एक रिसर्च पेपर में मौजूद जानकारी को आगे की शोध परियोजनाओं एवं अपने शोध कार्य के लिए उपयोग किया जाए जाए समझाया।
डॉ. अनुपमा हर्षल वाडावलिकर पिछले17 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी हुई है एवं अनुसंधान-आधारित शिक्षाशास्त्र pedology पर एसटीईएम शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए certified trainer प्रशिक्षक रही है। मुंबई विश्वविद्यालय में अपने स्नातक छात्रों के साथ 28 शोध परियोजनाओं मैं मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। जिनमें से 11 को मुंबई विश्वविद्यालय, यूजीसी और अन्य निजी प्रयोगशालाओं से अनुदान प्राप्त हुआ है।मेटैजिनोमिक्स मौलिक्येलर क्लोनिंग कैरक्टराइजेशन ऑफ मार्कस इन ओरल टोबैको कंज्यूमर के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का मार्गदर्शन किया है। देश भर में (डीबीटी/डीएसटी और सीओईएसएमई, आईआईएसईआर पुणे द्वारा अनुदान प्राप्त) कई क्षेत्रीय आरबीपीटी कार्यशालाओं में विषय विशेषज्ञ/पर्यवेक्षक के रूप एवं महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों के विज्ञान शिक्षकों के लिए क्षेत्रीय भाषा मराठी में अध्यापन कार्यशालाओं में content development for pedology के लिए resource person के रूप में जुड़ी रही है।
है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुदान प्राप्त इंडो-यूएस फोल्डस्कोप ग्रांट की प्राप्तकर्ता हैं, और वर्तमान में IISER, पुणे में प्रोजेक्ट मानव-ह्यूमन एटलस इनिशिएटिव के साथ जुड़ी हुई हैं। जिसमें उनकी भूमिका विज्ञान संचार और सार्वजनिक जुड़ाव के लिए एक सलाहकार के रूप में ऑनबोर्डिंग, छात्र प्रतिधारण के लिए गतिविधियों का संचालन, अपस्किलिंग कायऀ शामिल है। परिचर्चा के सत्र में प्रतिभागियों के सवालों का जवाब देते हुए डॉक्टर अनुपमा ने इस बात को माना कि हिंदी भाषी छात्रों को वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं से जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई अनुभव होती है जिसके लिए वे छात्रों के अनुरोध को अपनी संस्था के माध्यम से भारत सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी जाएंगी ताकि हिंदी भाषी शोधार्थी को भी शोध के क्षेत्र में लाभ मिल सके। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के हिंदी विभाग से डॉक्टर सरस्वती वर्मा ने किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक गण एवं स्टाफ शामिल हुए।





















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