लोकेशन-सुकमा
संवाददाता-संजय सिंह भदौरिया
*पोलावरम मामले पर कोंटा में हुई बैठक- पहुंचे केंद्रीय जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर कहा एक माह में डूबान क्षेत्र का सर्वे कराए अन्यथा अगस्त में होगा उग्र आंदोलन*
*पोलावरम बांध को लेकर वनवासी विकास समिति का बैठक सम्पन्न।*
*इस बैठक में पहुंचे केंद्रीय जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर*
*सरकार डूबान क्षेत्र का सर्वे नए सिरे करें: गिरीश कुबेर*
सुकमा-पोलावरम बांध को लेकर
अखिल भारतीय जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर ने बड़ी बात कही उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार एक माह के भीतर पोलावरम डूबान क्षेत्र का सर्वे नहीं करायेगा तो अगस्त महीने में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। एवं कोंटा सहित 9 डूबान गांवों से आए पोलावरम पुनर्वास संक्षेम समिति सदस्यों के साथ बैठक का आयोजन कर पोलावरम से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया।
उन्होंने कहा कि वनवासी विकास समिति छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में पोलावरम में बन रहे बांध से कोंटा सहित विकास खंड के जितने भी गांव डूबान क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं। उन परिवारों के लिए पैकेज, पुनर्वास में विस्थापन करने को लेकर विगत 6 माह से अपनी हक की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। इस मुहिम में पहुंचे अखिल भारतीय जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर ने कहा कि पोलावरम बांध कोंटा विकास खंड के डूबान गांव में निवासरत जनजाति समाज के संस्कृति और सभ्यता को ले डूब रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार डूबान क्षेत्र के प्रभावितों से न संपर्क किया न ही सर्वे कराया। बल्कि पोलावरम बांध को लेकर पोलावरम पुनर्वास संक्षेम समिति के सदस्यों ने जिस प्रकार लोगों को बांध से हो रहे नुकसान के बारे जानकारी देकर आंध्र प्रदेश सरकार 1986 बाढ़ को सीमा मानकर सर्वे कर रहे हैं उसी प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार से सर्वे करने के लिए मांग कर रहे हैं। तो उनके ऊपर भ्रम फैलाने एवम् राजनीति करने का आरोप लगाया जा रहा है।
*1986 की बाढ़ में प्रभावित हुए सभी गांवों में सर्वे करवाने की मांग*
गिरीश कुबेर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए जब समिति के लोग भ्रम फैला रहे हैं तो फिर सुकमा कलेक्टर दिल्ली जनजाति आयोग के पास कुछ गांव,265 मकान डूबने की बात क्यों कही? सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक बांध के विषय में किसी प्रकार का चर्चा नहीं करने की बात करने वाली सरकार फिर इन आंकड़ों को आयोग के पास क्यों बताना पड़ा और आने वाले बरसात में बाढ़ आने की संभावना को देख कर वहां की प्रशासन ने बाढ़ ग्रस्त इलाके के लोगों के लिए ऊंचे स्थानों में रहने के लिए कमरे, खाद्य सामग्री एवं पानी, बिजली, दवाई,गोताखोर, बोट, नाव, तक की व्यवस्था करने की बात क्यों कही गई। सुकमा कलेक्टर के बातों से साफ जाहिर हो रहा है कि कोंटा विकास खंड के जनजातियों के गांव पोलावरम बांध के चपेट में आ रहे हैं। बार बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार न करके जितने गांव 1986 में डूबे हैं उन सभी गांवों में सर्वे करवाना चाहिए।
*जनजातियों को पहले पट्टा दें उसके बाद पुनर्व्यवस्थापन करें*
जनजाति (आदिवासी) लोग बरसों से जल, जमीन ,जंगल, के ऊपर आश्रित रहकर जीवन व्यापन कर रहे हैं। कई लोगों के पास जमीन है लेकिन उसका भूमि पट्टा नहीं है। सबसे पहले उनको भूमि पट्टा दिया जाए और उनके लिए बांध बनने के पहले पैकेज देकर पुनर्वास में विस्थापित किया जाना चाहिए।
गिरीश कुबेर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार एक माह के भीतर पोलावरम डूबान क्षेत्र का सर्वे नहीं करायेगा तो अगस्त महीने में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।
*डूबान क्षेत्र के लोगों को न्याय मिलने तक ये आंदोलन जारी रहेगा-पी. विजय*
वनवासी विकास समिति के सदस्य पी. विजय ने कहा कि भारी बरसात में भी खेती किसानी काम छोड़कर डूबान क्षेत्र के 9 गांव के समिति सदस्य एवम् ग्राम के वृद्ध जनों ने बैठक में उपस्थित होकर सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए वनवासी विकास समिति के सदस्य पी. विजय ने कहा कि विगत 2 वर्षों से बरसात के दिनों में लगातार आ रहे बाढ़ से इस क्षेत्र के किसान खेती करने से वंचित हो रहे हैं उसके बाद भी सरकार के द्वारा बाढ़ पीड़ित लोगों को किसी प्रकार का सहायता किया जाता है ना ही मुआवजा राशि दिया जा रहा है। जिसको देख किसानों को मजदूरी कर जीवन यापन करना पड़ रहा है। विगत वर्षों जैसा बाढ़ पीड़ितों को नजरंदाज न करके इस वर्ष बाढ़ आने के पहले बाढ़ प्रभावित परिवारों को चिन्हित कर उनके जीवन व्यापन के लिए मुआवजा राशि दिया जाता तो बेहतर होता। जब तक छत्तीसगढ़ सरकार कोंटा सहित डूबान क्षेत्र के सभी गांवों का नए सिरे से सर्वे करवाकर आंध्र प्रदेश सरकार के जैसा दिए जा रहे आर आर पैकेज और पुनर्वास का दुगुना राशि देते तक ये आंदोलन जारी रखने की बात कही।
*कार्यक्रम में ये रहे शामिल-*
इस कार्यक्रम में कृष्ण कुमार वैष्णव (प्रांत जनजाति हितरक्षा प्रमुख छत्तीसगढ़) राम नाथ कश्यप (प्रांत सह संगठन मंत्री, वनवासी कल्याण आश्रम जगदलपुर) जेट्टी रामाराव वरिष्ठ नागरिक, हरिसिंह वरिष्ठ पत्रकार, सलवम राजाराव (किसान मोर्चा सदस्य) सोयम मुका, मोटू से पहुंचे दिवाकर ,आंध्र प्रदेश से पहुंचे श्रीमती रवनम्मा, चिट्ठी बाबू एवम् वनवासी कल्याण आश्रम कोंटा, डूबान क्षेत्र से पहुंचे समिति सदस्यों ने पोलावरम बांध के बारे में अपनी अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम की व्यवस्था एवम् संचालन पी.विजय ने किया। और सोयम मुका ने बैठक में पहुंचे सभी ग्रामीणों का आभार व्यक्त करके समापन की घोषणा की।




















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