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Thursday, July 8, 2021

 दिन दूनी रात चार गुनी के हिसाब से बढ़ रही है ग्राम सरपंच सचिव की आमदनी

बिरसा /सालेटेकरी।भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जिस व्यक्ति को जनता अपना हितैषी मानकर पांच सालों के लिए अपना जनप्रतिनिधि चुनती है जब वही व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ के लिए सारे नियम कानून, सारी संवेदनाये,सारी इंसानियत को भुलाकर सिर्फ और सिर्फ अपनी जेब भरता है तो सोचिए उस भारतीय के दिल पर क्या गुजरती होगी?शायद इसका अंदाजा न तो सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक सचिव और न ही ऊपर बैठे अधिकारियों को होता है।लेकिन कहते है न भगवान के घर देर है अंधेर नहीं।इंसाफ सभी के साथ होता है चाहे वह सरपंच हो या सचिव या कोई अधिकारी ।

 वैसे तो भ्रष्टाचार पूरे देश को अपने लपेटे में ले लिया है लेकिन बालाघाट जिले के बिरसा तहसील के सभी ग्राम पंचायतों में जिस कदर से भ्रष्टाचार का बोलबाला है शायद और किसी जगह पर नही होता होगा।इसकी सबसे खास वजह है यहाँ की भोली भाली जनता।आदिवासी बहुल जनपद पंचायत होने के कारण इस तहसील के अंतर्गत कोई भी सरकारी कर्मचारी एकबार आ जाता है तो दुबारा जाने का नाम नही लेता।इसकी भी खास वजह है यहाँ पर दूसरी तहसीलों के बनिस्पत ज्यादा अवैध कमाई होती है।जनपद पंचायत बिरसा के अंतर्गत बहुत सारी ग्रामपंचायते ऐसी है जो मृतक व्यक्तियों के नाम पर भी कार्य कराकर राशि का बंदरबांट कर लेती है और किसी को कानो कान खबर नही लगती।भला हो उन मीडिया रिपोर्टेरो की जो ग्रामपंचायत में हो रहे काले कारनामे को उजागर करने में पूरा दमखम लगा देते है।जो मामला सामने आ भी जाता है उस पर कार्यवाही के नाम पर लीपा पोती किया जाता है।जिस व्यक्ति के पास चलने के लिए एक अदद साइकिल नही हुआ करती थी


वही व्यक्ति सरपंच बनते ही दो से तीन वर्षों में ही ट्रेक्टर और मोटरसाइकिल की लाइन लगा देता है कैसे?जाहिर सी बात है जो रुपया जनता के हित में लगाने के लिए आता है उसमें जमकर बंदरबांट किया जाता है।अभी कुछ दिन पूर्व बहेराभाटा,कनिया, कचनारी, जमुनिया, लालपुर, दमोह,अडोरी,भीमलट, गोवारी,भूतना,सोनगुड्डा,मानेगांव आदि ग्रामपंचायतो में जमकर भ्रष्टाचार की खबरे प्रकाशित हुई मगर किसी सरपंच सचिव के ऊपर कार्यवाही नही हुई क्यों?क्योंकि बंदरबांट सब जगह हुआ।सरकार कब लगाएगी भ्रष्टाचार पर अंकुश?यह देश के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है शायद कभी नहीं?गुणवत्ताविहीन कार्य करवाकर सरपंच सचिव मालामाल हो रहे हैं और देश की जनता कंगाल हो रही है।अगर सही ढंग से सरकारी राशि का उपयोग कर ईमानदारी से कार्य कराया जाय तो देश की सूरत और सीरत दोनों बदल जाये।लेकिन यह सब सिर्फ मुंगेरी लाल के सपने जैसे ही है।क्या सरकार उन सरपंच और सचिवों की संपत्ति की जांच करा सकती है जो पांच सालों में चार गुना बढ़ गयी है?

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