महासमुंद 27 जुलाई 2021/ शासकीय माता कर्मा कन्या महाविद्यालय महासमुन्द में दिनांक 27 जुलाई 2021 को हिन्दी विभाग एवं आईक्यूएसी द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय “हिन्दी उपन्यासों में स्त्री की दशा और दिशा" रखा गया था क्योंकि साहित्य में स्त्री एक ऐसा शब्द है जिस पर विचार मंथन हर काल में किया गया है। इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने मंतव्य रखने के लिए विषय विशेषज्ञ के रूप में भाषा और साहित्य से संबंधित उच्च स्तरीय पुस्तकों का लेखन और संपादन एवं ख्यात सम्मान एवं पुरस्कारों से विभूति प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार शर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी अध्ययन शाला, कला संकाय अध्यक्ष एवं कुलानुशासक विक्रम • विश्वविद्यालय उज्जैन (म.प्र.) से थे। उन्होने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत सदियों से कथा रसिक देश है यहां दादी, नानी हमे कहानी सुनाती आयी है उपन्यासकारों ने उपन्यास लेखन में स्त्री के हर चरित्रों को उद्घाटित किया है, स्त्री से जुड़े प्रश्नों को लेकर उपन्यासकार अपनी रचना कर रहे हैं। स्त्री की अनसुनी आवाजों को उपन्यासकारों ने सुना और समाज के सामने लाया है। उन्होंने प्रेमचंद से लेकर वर्तमान में महिलाओं पर लिखने ने वाले महिला रचनाकार कृष्णा सोबती, उषा प्रियम्बता के उपन्यासों में स्त्री पात्रों का वर्णन किया।
संगोष्ठी के दूसरे विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. प्रिया ए सहायक प्राध्यापक हिन्दी विभाग कुरियाकोस ग्रेगोरियस कॉलेज पाम्पडी, कोट्टयम, केरल से रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में उपन्यास का शाब्दिक अर्थ बताते हुए कहा कि स्त्री जीवन के यथार्थ को उपन्यासकारों ने अपने लेखन में पिरोया है। पुरूष वर्चस्व को झेलते हुए नारी आज अपने सशक्त पहचान बना ली है। पुरुष के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलने वाली महिला रचनाकारों के माध्यम से नारी का सशक्त रूप सामने आने आया है। जिनमें कृष्णा सोबती, उषा प्रियम्बदा जैसी लेखिकाएं हैं, जिन्होंने नारी का अलग चित्रण अपने उपन्यासों में किया है। उनके उपन्यासों में रूढ़ियों से हटकर संघर्ष की ओर बढ़ते हुए अपनी पहचान स्थापित करती हुई महिलाओं का चित्रण परिलक्षित होता है।
विश्व हिन्दी साहित्य संस्था के प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख द्वारा विषय की महत्व को बताते हुए। उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य में स्त्री का सशक्त चित्रण उपन्यासों के माध्यम से दिखाई देता है। स्त्री उपन्यासकारों ने अपने उपन्यास में स्त्री चित्रण को बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है, जिनके माध्यम से समाज के हर पहलु उद्घाटित होते हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रमेश कुमार देवांगन ने स्वागत उद्बोधन दिया साथ ही उन्होंने महर्षि मनु की पंक्ति को दोहराते हुए कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं। यह कथन सवत्र सत्य है हमें सदैव स्त्री का सम्मान करना चाहिए। प्राचीन काल से स्त्री महत्वपूर्ण भूमिका हमारे समाज में रही है।
कार्यक्रम का संचालन एवं संगोष्ठी के विषय का उद्देश्य डॉ सरस्वती वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी एवं कार्यक्रम समन्वयक ने किया उन्होंने कहा कि साहित्य में इतिहास की गाथा छिपी हुई है और उपन्यास एक ऐसी विधा है जिसमें समाज के हर पहलू उद्घाटित होते हैं। हिन्दी उपन्यासों में स्त्री पात्र को लेकर कथानक लिखे गये स्त्री जीवन के विभिन्न पहलुओं और संभावित तथ्यों को उद्घाटित करने का उपन्यासकारों ने यथासंभव प्रयास करते रहे हैं।
इस कार्यक्रम के लिए व्याख्यान समग्र एवं धन्यवाद ज्ञापन सूक्ष्मजीव विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ स्वेतलाना नागल द्वारा किया गया। इस संगोष्ठी में कई राज्यों से जुड़े लखनउ, दिल्ली, केरल उज्जैन, महाराष्ट्र, पुणे, औरंगाबाद, गाजियाबाद, उत्तराखण्ड आदि से 265 प्रतिभागी जुड़े एवं वाणिज्य विभाग के डॉ. तपेशचन्द्र गुप्ता एवं विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्था के विभिन्न सदस्य इस कार्यक्रम से जुड़कर लाभान्वित हुए।
महाविद्यालयीन स्टॉफ के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एस.बी. कुमार, डॉ. शालिनी वर्मा, श्री वेनेन्द्र कुमार साहू, फलेश्वर दीवान, गजपति पटेल, लेखराज बंजारे, श्रीमती अहिल्या लहरे व विनोद बजारे में सम्पूर्ण कार्यक्रम में सार्थक सहयोग प्रदान किया।


















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