बालाघाट जिले के समस्त क्षेत्रों में मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
आपको बता दें कि बालाघाट जिले की हर तहसील में सर्व आदिवासी समाज द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर भूमि पूजन कर अपने आराध्य बड़ा देव की स्थापना की साथ ही पारंपरिक रूप से पूजन कर रैली निकालकर ग्राम भ्रमण कर,सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि हमारा तहसील आदिवासी बहुल है यहां की जनजाति कला व संस्कृति अनमोल है, आदिवासी शब्द दो शब्दों आदि और वासी से मिलकर बना है और इसका मूल अर्थ मूलनिवासी है आदिवासी समुदाय का जीवनकाल जल जंगल और जमीन और प्रकृति से जुड़ा है आदिवासी समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है।
साथ ही उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सरकार से वन अधिकार मान्यता द्वारा दिए गए सामुदायिक वनों की निजीकरण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की व प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों के साथ भेदभाव ना करते हुए अवास के लिए 5 लाख रुपये दिए जाने की मांग की, साथ संविधान के अनुच्छेद 366अ 25 के तहत जनजाति समुदाय के किसी धर्म का हिस्सा ना मानते हुए रूढ़ि प्रथा व पारंपरिक समुदाय का उल्लेख है,अतः आदिम जनजाति समुदाय प्रकृति वादी है किसी भी धर्म बंधन से मुक्त है,कहते हुए अपना कलम अलग से करने की मांग मांग की। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज एवं अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति रही।


















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