दुर्ग 17 सितंबर 2021/
निरंतर प्रयास व लगन के साथ कार्य करने और कर्तव्य पथ पर अड़िग रहने से कामयाबी खुद-ब-खुद चलकर कदम चुमती है।
जीवन में चाहे मुश्किलें कितनी भी आए, जो इसे मुक्कदर मानकर आगे बढ़ता है, वह औरो के लिए मिसाल बन जाता है।
कहा जाता है कोई भी कार्य बड़ा या छोटा नहीं होता है। बस जरुरत है उसे सार्थक साबित करने की।
यह बात धमधा के ग्राम पंचायत बिरेभाट के किसान श्री लीलेयवर यादव ने साबित कर दिखाया है। लीलेश्वर यादव अपने गांव में खेती बाड़ी का काम करता है।
यहीं उसकी नियति और जीवकोपार्जन का जरिया है। कहते है किस्मत बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही वाक्या लीलेश्वर यादव के साथ हुआ।
उन्होनें गोधन न्याय योजनांतर्गत गोबर बेचकर एक सीजन मेें 45 हजार रूपए का लाभ अर्जित किया है।
ग्राम पंचायत बिरेभाट में मानसूनी खेती के अलावा उद्यम का और कोई साधन ना के बराबर है। जिससे यहां के हर व्यक्ति मानसून को छोड़कर बाकी समय खाली रहते हैं।
काम में रोजगार नहीं होने से अधिकत्तर लोग किसी दूसरे गांव या शहर जाकर काम की तलाश करते है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी ने अनेकों लोगों के लिए अपने घर व गांव में ही रोजगार मुहैय्या कराने का जरिया साबित हुआ है।
लीलेश्वर यादव ने गौठान से जुड़कर कम समय 45 हजार रूपए की आमदानी अर्जित किया है।
मिली राशि से उन्होनें अपनी पत्नी के जेवर क्रय किया है। जेवर मिलने पर उनकी पत्नि भी काफी खुश है।
लीलेश्वर यादव अब पहले की तुलना में कामयाब नजर आ रहे हैं। इसके लिए उन्होनें गोधन योजना को लोगों के रोजगार और लाभ कमाने का अच्छा स्त्रोत मानते है।
लुकेश साहू दुर्ग जिला से.....
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