दो साल से स्कूल भवन अतिजर्जर, छत में हो गया बड़ा छेद,खतरें के चलते 36 बच्चों को पढ़ाई के लिए गांव के सार्वजनिक मंच में बैठना पड़ रहा, फिर भी नही हो पाया उद्धार
खैरागढ़ - ब्लाक के वनांचल ग्राम चिचका के आश्रित ग्राम तेलीटोला स्थित प्राथमिक शाला की छत में दो साल से बड़ा छेद हो गया है । खतरें को भांपतें स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक बच्चों को दो साल से सार्वजनिक मंच में पढ़ा रहे है । शिक्षा विभाग में स्कूल भवन को
अतिजर्जर घोषित कर इसकी जानकारी भी उच्च अधिकारियों को कई बार भेजी है। इसके बाद भी तेली टोला के नौनिहालों के लिए स्कूल भवन अब तक उपलब्ध नहीं हो पाया है । 1995 में बनें प्राशा तेलीटोला स्कूल भवन काफी ज्यादा जर्जर हालत में है। कमरें की छत दरक गई है । छत का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर चुका है। छत की सलांखें बाहर आ गई है। सूरक्षा की दृष्टि से शिक्षकों ने बच्चों को कमरे में बिठाना छोड़ दिया। स्कूल की हालत मरम्मत के लायक भी नहीं है। ऐसे में इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई । अधिकारियों ने स्थिति देख स्कूल भवन को अतिजर्जर स्कूल भवन बताकर यहाँ पढ़ाई सहित अन्य कार्यों पर विराम लगा दिया। पिछले दो साल से स्कूल में दर्ज 36 बच्चों को गांव के मंच में पढ़ाई कराई जा रही है । I
दो साल से मांग रहे भवन
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर होनें और छत गिरनें की वजह से छात्रों को अस्थाई तौर पर मंच पर पढ़ाई कराई जा रही है । इसके अलावा गांव में कोई व्यवस्था नहीं है। क्षेत्रीय जनपद सदस्य शैलेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि ग्रामपंचायत, ग्रामीणों, स्कूल प्रबंधन समिति सहित वें स्वयं शिक्षा विभाग, जनपद पंचायत और शासन को कई बार स्कूल भवन के नवनिर्माण के लिए पत्राचार कर चुके है । लेकिन अब तक इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं बन पाई है। जर्जर भवन के चलते बच्चों को भविष्य अंधकार मय हो गया है। पिछले साल भी कोरोना के बाद भी बच्चों को मंच से ही व्यवस्था बनाकर पढ़ाई कराई गई थी ।
बारिश हुई तो पढ़ाई बंद
खुले मंच में चल रहे तेलीटोला के स्कूल के 36 छात्रों को बारिश और ज्यादा ठंड में पढ़ाई बंद करनी पड़ती है। बारिश हुई तो खुले मंच में बचने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चों को छूटटी दे दी जाती है। ठंड के दिनों में भी खुले में पढ़ाई नहीं हो पाती तो बच्चें घर पर ही रहतें है। बताया गया कि पहले यहाँ दो शिक्षक पदस्थ थें एक के नहीं होने के बाद अब एक शिक्षक ही यहाँ मंच पर बच्चों को पढ़ाई करातें है । I
ब्लाक में 16 स्कूल भवन अतिजर्जर
शिक्षा विभाग भी ब्लाक भर के अतिजर्जर स्कूलों की जानकारी जुटाकर हर साल केवल उच्च कार्यालय तक भेजने में सिमट गया है। मिली जानकारी मुताबिक ब्लाक में 16 स्कूल भवन पूरी तरह अतिजर्जर हालत में है। जहाँ खतरों के चलते कक्षाओं का संचालन नहीं किया जा रहा है। इन स्कूलों के बच्चों को खुले मंचों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, ग्राम पंचायत भवन सहित अन्य स्कूलों में व्यवस्था बनाकर पढ़ाई कराई जा रही है। अतिजर्जर स्कूलों में 11 प्राशा भवन और 5 माशा भवन शामिल है । प्राशा भवन के अतिजर्जर में तेलीटोला सहित गाडाघाट, बोइरडीह, कुसियारी, पूराना करेला, कटंगीखुर्द, अचानकपूर, जगन्नाथपूर, कामठा, कोठरीछापर, घोंघेडबरी शामिल है। माशा भवन में जोरातराई, घोंघेडवरी, बरगांव नवांगांव, भूरसाटोला अतिजर्जर हैं। इसके अलावा जर्जर स्कूलों में ब्लाक में लगभग 31 स्कूल भवन है जहाँ हर पल खतरा बना हुआ है । इसमें 21 प्राशा और 10 माशा स्कूल भवन शामिल है ।
तेलीटोला सहित अन्य अतिजर्जर स्कूल भवनों की जानकारी उच्चाधिकारियों को समय समय पर भेजा गया है। स्वीकृति सहित अन्य कार्य उच्चकार्यालय से ही होना है । तेलीटोला में मंच में व्यवस्था बनाकर स्कूल का संचालन किया जा रहा है। जर्जर भवन का उपयोग बंद कर दिया गया है ।
महेश भुआर्य, बीईओं खैरागढ़
तेलीटोला स्कूल भवन के अतिजर्जर और खतरनाक होने के बाद इसके नवनिर्माण के लिए लगातार दो साल से पत्राचार कर भवन की मांग की जा रही है। लेकिन पिछले दो साल से स्थिति जस की तस है। बच्चों को परेशानियों के बीच पढ़ाई करना मजबूरी है। ऐसे में शिक्षा की प्रारंभिक नीव ही कमजोर साबित हो रही है ।
शैलेन्द्र त्रिपाठी, क्षेत्रीय जनपद सदस्य खैरागढ़
*सीएनआई खैरागढ़ से सोमेश कुमार की रिपोर्ट*

















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