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Sunday, November 13, 2022

भागवत कथा सुनने लोगों उमड़ा जनसैलाब ।

 राजनांदगांव 


भागवत कथा सुनने  लोगों उमड़ा जनसैलाब ।



डोंगरगढ़- बुधवारी पारा में भगवत कथा सुनने उमड़ रहा है भीड़ भागवत कथा में पंडित मनोज शर्मा के द्वारा रोजाना दे रहे प्रवचन को सुनने शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पहुच रहे है महाराज श्री ने कहा कि 

मानव मात्र को  परम सुख व परम शांति अध्यात्म से ही मिल सकता है , 

और अध्यात्म का संपूर्ण सार

श्री मद्  भागवत कथा ही है , 

जीव को परमात्मा से जुडने 

का एकमात्र माध्यम  भगवत कथा ही है, श्रृंगी ऋषि का श्राप 

तक्षक सर्प  के डसने पर   मृत्यु होगी ,  सुनकर राजा परीक्षित चिन्ता छोड भगवत चिन्तन का आश्रय लिया,  सद्गुरु भगवान श्री शुकदेव जी द्वारा भगवत्कृपा स्वरूप भागवत कथा श्रवण कर 

भगवत्गति  को प्राप्त किया , 

भगवत कथा का भुल उद्देश्य, 

,पिबत भागवतं समालयं ,

है, 

अर्थात जब तक शरीर में चेतना है भगवत रस का पान करते रहो,

भागवत कथा मे

विभिन्न कथा प्रसंगों  के माध्यम से ज्ञान, भक्ति, वैराग्य 

मनुष्य को प्राप्त होता है, 

क्योंकि मनुष्य के पास जीवन तो है परंतु जीवन जीने की कला नही है, 

भागवत कथा मनुष्य को जीवन को जीना सिखाती है, 

प्रह्लाद कथा प्रसंग  मे 

हरि सर्व भुतेषु , के अनुसार 

भक्त प्रह्लाद को  खंभे मे भगवत दर्शन  मिला, परंतु 

हिरण्यकषिपु को दर्शन नही हुआ,  तात्पर्य यह है कि 

प्रह्लाद जैसे भक्ति की दृष्टि रहेगी तो हर वस्तु मे भगवत दर्शन होगा, 

अहंकारी मनुष्य स्वयं  को ईश्वर समझता है तो भला  उसको ईश्वर कहाँ  दिखेगा,


समुंदर मंथन  कथा का वर्णन किया ,उन्होंने कहा कि भक्ति रूपी अमृत पाने के  प्रयास में कभी कभी मन रूपी मंदराचल धसने लगता है ।तब आत्मज्ञान के प्रतिक जो जगदाधार हैं वही भगवान  कच्छप रूप में  आधार देते हैं। समुंद्र मंथन में अमृत के पहले विश निकला है,जिसे भगवान शिव ने पान किया,संताप रूपी जहर पीने वाला ही शिव होता है।वामन अवतार के बारे में पं.शर्मा ने बताया कि जीवन में जब जब देहाभिमान अहंकार जगता है, ईश्वर सबल हो जाता हैं और जब साधक के जीवन में सत्य,प्रेम,भक्ति,करुणा का भाव जगता हैं तो वहीं ईश्वर बालक बनकर कोशिल्या,देवकी,मैया यशोदा  के गोद में आकर परम सुख प्रदान करते   हैं, ईश्वर सत्य रूप में सर्वव्याप्त है निर्गुण ईश्वर सत्य रूप में सर्वव्याप्त है पर वही ईश्वर सगुण साकार में सत्य,प्रेम,करुणा के द्वारा प्रकट हो जाते हैं। भगवान की कथा ही जीव मात्र की व्यथा को दुर करती है, 

भगवान श्री  कृष्ण ही सच्चिदानंद है, जन्मोत्सव ही परमानंद है,  ।

श्रोताओं की अपार भीड़ संगीत मय  कथा रसपान करने पहुच रहे हैं, ।




सी एन आई न्यूज राजनांदगांव से रोशन पटेल की रिपोर्ट।

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