बिलासपुर से सुरेंद्र मिश्रा
बिलासपुर ---एक तरफ सरकार पुराने चिटफंड के मामलों को सुलझाते हुए पीड़ित पक्ष को राहत दिलाने का दावा कर रही है, लेकिन इसी दौरान नए नए तरीके से ग्रामीण और निवेशक लूटे जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर में बसे गांव केंदा में भी इसी तरह का गोरखधंधा किया गया है। पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठा है, जिसमें कभी भी विस्फोट संभव है। यहां उत्तर प्रदेश से आकर बसे एक परिवार का मुखिया कभी बिलासपुर से पेंड्रा की ओर चलने वाली बस सर्विस का हिस्सा हुआ करता था लेकिन आज यह परिवार करोड़ों में खेल रहा है। आसपास के भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर उनके खून पसीने की कमाई निवेश कराई गई है और अब यह परिवार धीरे-धीरे योजनाबद्ध तरीके से दूसरे प्रदेश में शिफ्ट होने लगा है।
करीब 6 महीने पहले अचानक केंदा में एक इन्वेस्टमेंट ऑफिस खोला गया , जिसमें दावा किया गया कि लोगों का पैसा 2 महीने में दोगुना कर दिया जाएगा। पैसा डबल होने की लालच में लोगों ने अपने गांठ की जमा पूंजी उस परिवार के हवाले कर दी। लोगों का भरोसा जीतने 2 महीने में ही सब को दुगुना पैसा रिटर्न भी किया गया, जिससे लोगों की लालच और बढ़ गई और ग्रामीणों ने इधर-उधर, जहां से पाया कर्जा लेकर पैसा डबल होने की उम्मीद में निवेश कर दिया। बताया जा रहा है कि इस तरह आसपास के ग्रामीणों ने करीब 12 से 15 करोड़ रुपए का निवेश कर दिया। निवेश के 2 महीने बाद उन्हें पैसा डबल मिलना था लेकिन यहीं से गोरख धंधा शुरू हो गया है।
जिस फर्जी कंपनी ने पहली मर्तबा उन्हें 2 महीने में ही दुगना पैसा लौट आया था वह अब टालमटोल करने लगी है। 2 महीने की जगह 4 महीने हो गए हैं, लेकिन किसी भी निवेशक को रिटर्न नहीं मिला है। जब भी वे इस बारे में पूछताछ करते हैं तो उन्हें अगली तारीख बता दी जाती है। अब भी रुपए डबल होने के लालच में लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसलिए इस बड़े रैकेट के जरिए ठगी का शिकार होने वाला कोई भी किसी भी स्तर पर इसकी शिकायत करने को तैयार नहीं।
इधर सूत्रों से पता चला है कि इस परिवार के सदस्य धीरे-धीरे अपने मूल स्थान उत्तर प्रदेश शिफ्ट हो रहे हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक जानकार ने बताया कि परिवार की योजना है कि उनके परिवार में से कोई एक सदस्य इस फर्जीवाड़े का इल्जाम अपने सर लेकर जेल चला जाएगा और कुछ महीने बाद छूटकर आ जाएगा। लेकिन इस तरह से करीब ₹15 करोड पर उनका कब्जा हो जाएगा। इधर आसपास के ग्रामीणों ने ब्याज पर रकम लेकर पैसा दोगुना होने की लालच में निवेश किया है। तय वक्त से दुगना समय बीत जाने के बावजूद अभी भी पैसा रिटर्न की कोई उम्मीद नहीं है । इधर ब्याज पर रकम उधार देने वाले भी तकादा करने लगे हैं। अगर ऐसा ही कुछ और महीने खींच गया तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। जानकार बता रहे हैं कि केंदा और आसपास के ऐसे कई ग्रामीण हैं, जिन्होंने अपनी हैसियत से बढ़कर निवेश किया है ।उन्हें उम्मीद थी कि इस तरह से उन्हें दोगुनी रकम मिल जाएगी क्योंकि ऐसा वह आजमा चुके थे। लेकिन उन्हें नहीं पता कि अधिकांश ठग ग्राहक फसाने के लिए इसी पैटर्न का इस्तेमाल करते हैं। अब अगर जल्द ही उन्हें रकम नहीं मिली, जिसकी उम्मीद भी नहीं है, तो बड़े पैमाने पर निवेशक खुदकुशी भी कर सकते हैं। लोगों की माने तो पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी है। कुछ महीने पहले पुलिस के आला अधिकारी भी मामले की जांच के लिए पहुंचे थे, लेकिन फिर सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। इसके पीछे जो भी वजह हो लेकिन आसपास के गरीब मजदूर, किसानों ने अपने घर की एक-एक पाई और कर्ज लेकर भी भारी-भरकम रकम मुनाफे की उम्मीद में निवेश किया है , जिस के डूबने की पूरी आशंका है।
चिटफंड की तरह यहां भी एक बड़ा घोटाला चुपचाप अंजाम दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में यह सब कुछ होने से इसकी खबर भी सुर्खिया नहीं बटोर रही।लोगों लेकिन अगर गंभीरता से मामले की जांच की जाए तो बहुत बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो यह भी संभव है कि शिकायतकर्ता भी सामने आकर खुलकर शिकायत करेंगे, जो वर्तमान में इसकी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।


















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