सावन माह पर विशेष:
आगे बढ़ते जाओं तूम मत देखों अपने पैर के छालों को
अमरकंटक मार्ग हनुमंतखोल से लेकर कुकदूर, जलेश्वर महादेव और पंचमुखी बुढ़ा महादेव से लेकर भोरमदेव तक जगह-जगह कावंड़ियों के लिए मरहम पट्टी की व्यवस्था
उत्साह और उमंग के साथ कावड़ियों की संख्या में इस बार इजाफा
कवर्धा, 23 जुलाई 2022। पवित्र श्रावण माह का कल तीसरा सोमवार है। बीते इस पूरे माह में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से लेकर मध्यप्रदेश की अमरकंटक तक बोल-बम और हर-हर महादेव का गुंजायमान होने लगा है। ऐसी ही नजारा पड़ोंसी जिले बेमेतरा, मुंगेली और राजानांदगांव के सरहदी क्षेत्रों से आने वाले पदयात्रियों और कांवड़ियो में उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा है। पड़ोंसी जिलों की तुलना में अमरकंटक से मां नर्मदा की जल लाने वाले कांवड़ियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। कांवड़ियो की बढ़ती संख्या को देखते हुए कबीरधाम जिला प्रशासन द्वारा कांवडियों की मूलभूत सुविधाओं, जैसे उनके ठहरने की व्यवस्था, उनके प्राथमिक स्वास्थ्य की व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं में भी विस्तार किया जा रहा है।
कलेक्टर श्री जनमेजय महोबे के निर्देशानुसार अमरकंटक से पहाड़ी और पथरिली जंगलों की रास्तों से कबीरधाम जिले में प्रवेश करने वाले सभी कावड़ियों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। कबीरधाम जिले के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हनुमंतखोल के पास कांवड़ियो के उपचार की बेहतर व्यवस्था कराई जा रही है। यहां चिकित्सक से लेकर स्टॉप नर्स और ड्रेसर्स कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसी प्रकार कांवड़ियो को ठहराने के लिए उचित व्यवस्था की गई है। अमरकंटक से लेकर भोरमदेव पहुंच पहुंच मार्ग पर अलग-अलग 7 से 8 स्थानों पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर कांवड़ियों को पांव के छालों में आवश्यकतानुसार पट्टी लगाई जा रही है, तो वही कांवड़ियों के पैरों में होने वाले मोच व अकड़न को ठीक करने के लिए स्प्रे की व्यवस्था बनाई गई है। स्वास्थ्य टीम द्वारा कांवडियों का हौसला बढ़ाते हुए यह भी कहा जा रहा है कि आगे बढ़ते जाओं तूम मत देखों अपने पैर के छालों को।
प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एम सूर्यवंशी ने बताया कि अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैकड़ों कांविड़यों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई गई है। कांवड़ियो के पैरो में होने वाले छालों के उपचार सहित अन्य सुविधा भी देने में टीम लगी हुई है। इसके अलावा कवर्धा के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर के सपीम 6 अलग-अलग समाजिक भवन व विशेष वाटर फ्रुप टेंट लगाकर विश्राम शिविर बनाई गई है। श्रद्धालु और कांवरियों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए जिला प्रशासन के पूरा अमला, कोटवार से लेकर प्रशासनिक अधिकारी, नगरीय निकायों के अमले और अन्य सुविधाएं सहित पुलिस के जवान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाने में लगे हुए है।
*उत्साह और उमंग के साथ कावड़ियों की संख्या में इस बार इजाफा*
पवित्र श्रावण मास में भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने वाले कांवड़ियों के लिए प्रत्येक सोमवार को ज्वाइड हैण्डस् द्वारा मंदिर परिसर के समीप निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की जाती है। इस भोजन में कांवरियों के लिए दाल-भात-सब्जी से लेकर मीठा जैसे खीर, पुड़ी व हलवे भी निःशुल्क दी जाती है। कांवड़ियों को निःशुल्क जल-पान करने वाले ज्वाइंड हैण्डस् के सदस्यों ने बताया इस बार कांवड़ियों की संख्या पिछले सालों की तुलना भी बढ़ी है। सदस्यों ने बताया कि मंदिर परिसर में आने वाले सभी कांवड़ियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नही हो इसके लिए समन्वय बना कर पूरा व्यवस्था बनाने में सहयोग भी किया जा रहा है।
*कवर्धा को क्यो कहा जाता है छोटा काशी*
कहते है कि काशी के कण-कण में भगवान शिव का वास है। मां गंगा पावन तट पर बसे विश्व की धार्मिक राजधानी काशी को शायद इसीलिए मोक्षदायिनी भी कहा जाता है। ऐसी ही काशी की समतुल्यता की झलक छत्तीसगढ़ की कबीरधाम जिले में दिखाई देती है।
CNI NEWS कवर्धा छत्तीसगढ़ से अनवर खान की रिपोर्ट


















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