आराधना महोत्सव के रूप में मनाया गया करपात्रीजी का निर्वाण दिवस
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - आज धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के 42 वाॅं निर्वाण आराधना महोत्सव के पुण्य अवसर श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी , शिव गंगा आश्रम प्रयागराज , हरिहर आश्रम वृंदावन, विमलाम्बा संस्थान होशियारपुर पंजाब एवं श्रीसुदर्शन संस्थानम् रायपुर के साथ साथ पूरे देश भर में विभिन्न आराधना कार्यक्रम एवं सेवा आयोजित हुआ। जिसमें पुरी शंकराचार्यजी द्वारा संस्थापित संगठन के द्वारा आराधना महोत्सव पर कार्यक्रम आयोजित कर स्वामी करपात्रीजी को पुण्य स्मरण के साथ अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं सनातन संस्कृति संरक्षणार्थ नैला जांजगीर में आयोजित श्री साम्बसदाशिव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में भी आचार्य पं० झम्मन शास्त्रीजी की समुपस्थिति में करपात्री निर्वाण दिवस पर रुद्राभिषेक एवं सहस्त्रार्चन का कार्यक्रम संपादित हुआ।इसी कड़ी में धर्मसंघ पीठपरिषद्, आदित्यवाहिनी - आनन्द वाहिनी जिला जांजगीर चाम्पा इकाई द्वारा श्रीत्रिलोकीनाथ मन्दिर शांतिनगर रेलवे स्टेशन के समीप चाम्पा में पीठपरिषद् राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पुरी शंकराचार्यजी के कृपा पात्र शिष्य प्रख्यात अध्यात्मवेत्ता आचार्य झम्मन शास्त्रीजी के सानिध्य में सायं सत्र में स्वामी करपात्रीजी की रामराज्य पर अवधारणा पर सारगर्भित प्रवचन आचार्य प्रवर के श्रीमुख से श्रवण करने का सौभाग्य सुलभ हुआ। स्वामी करपात्रीजी के तैलचित्र की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना कर इस अवसर पर आचार्य झम्मन शास्त्रीजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये स्वामी करपात्रीजी के जीवन दर्शन पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। आचार्यश्री ने बताया कि ऐसे महान विभूति भारतवर्ष में धर्म एवं राष्ट्र रक्षा के लिये समय - समय पर देव लोक से प्रकट होते हैं। सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं वैदिक मर्यादाओं की स्थापना, सनातन मान बिंदुओं की रक्षा के लिये धर्मसम्राटजी का योगदान इतिहास में सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने कम समय तथा अल्प भौतिक साधन होने पर भी अपने वैदुष्य तथा तपोबल के द्वारा देश को स्वतंत्रता दिलाने में वेदोक्त रीति से शास्त्रीय परंपरा अनुकूल यज्ञ का संपादन कर दैवीय शक्तियों के माध्यम से सफलता दिलाने में बहुमूल्य योगदान प्रदान किया। गौ रक्षा के लिये उनका जीवन संपूर्ण रूप से समर्पित रहा, शासन तंत्र से कठिन यातना प्राप्त हुई , कई बार जेल गये। उन्होंने गौ रक्षा महाभियान का नेतृत्व करते हुए दस लाख गौ भक्तों के साथ संसद का घेराव भी करवाया , कई गौ भक्त शहीद भी हुये, किंतु दृढ़तापूर्वक सनातन धर्मावलंबियों का मनोबल, उत्साह को बढ़ाते हुये जीवन पर्यंत गौ रक्षा के लिये उन्होंने अपने समर्पित भाव से त्याग पूर्वक कार्य किया। आज भी उनका आदर्श जीवन अनुकरणीय है। स्वामी करपात्रीजी के चरणों में सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि संपूर्ण गोवंश की हत्या देश में शीघ्र बंद हो, जिससे हिंदुओं को न्याय मिले तथा भारत शीघ्र हिंदुराष्ट्र के रूप में उद्भाषित हो। उनके बताये पदचिन्हों में चलते हुये गोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य महाभाग देश की अखंडता एवं श्रीराम राज्य के स्वरूप को स्थापित करने हेतु ही हिंदु राष्ट्र की स्थापना के लिये दिन – रात पूरे देश के विभिन्न प्रांतों में राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रवास करते हुये समग्र हिंदू समाज को जागृत करने हेतु विशेष मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। आचार्य शास्त्री ने अपील किया कि सभी भक्तजन सामूहिक तथा व्यक्तिगत रूप से हनुमान चालीसा का पाठ एवं साप्ताहिक संगोष्ठी के माध्यम से जन जागरण अभियान में सम्मिलित होकर अपने जीवन को धन्य बनायें। इस अवसर पर बी०डी० दीवान, डाॅ जी०पी० दुबे, मोहन द्विवेदी, पद्मेश शर्मा, केदार मिश्रा, ललित दुबे, लिलेश्वर तिवारी, जगदीश मिश्रा, राजेश शुक्ला, अनुभव मिश्रा , अरविन्द तिवारी, वीरेंद्र शर्मा (भाटापारा) , दिनेश शर्मा, रविशंकर पाण्डेय, गणेश श्रीवास, लोकनाथ राठौर, महेश अग्रवाल , उदयचंद देवांगन, शशिभूषण सोनी , सिद्धनाथ सोनी सहित पीठ परिषद , आदित्य वाहिनी के पदाधिकारी प्रतिनिधि एवं सदस्य तथा सनातन धर्मप्रेमी भक्तों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आराधना पर्व में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।


















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