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Wednesday, May 1, 2024

जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट के माया राम नट ने सूअर बेचकर नामांकन पत्र खरीदा। अपनी बहू विजय लक्ष्मी को असंख्य समाज पार्टी से चुनावी मैदान में उतार रहे हैं।

 जिला - जांजगीर चांपा 



विक्रम कुमार सूर्यवंशी की रिपोर्ट 


जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट के माया राम नट ने सूअर बेचकर नामांकन पत्र खरीदा। 




अपनी बहू विजय लक्ष्मी को असंख्य समाज पार्टी से चुनावी मैदान में उतार रहे हैं।


 जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट के लिए हर बार सभी चुनाव लड़ने वाले माया राम नट ने सूअर बेचकर नामांकन पत्र खरीदा है। इस बार वे अपनी बहू विजय लक्ष्मी को असंख्य समाज पार्टी से चुनावी मैदान में उतार रहे हैं। 





इससे पहले, वे खुद पंचायत, जनपद और विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।


दरअसल, महंत गांव के रहने वाला ससुर  माया राम नट घुमंतू समाज से आते हैं।





 इनकी पीढ़ी बांस के डांंग में करतब दिखाते आ रही है, जिन्हें नट या डंगचगहा भी कहते हैं। उन्हें करतब के लिए पहचाना जाता है,

ससुर मायाराम का सूअर पालन का व्यवसाय है।


2001 से शुरू हुआ चुनाव लड़ने का सिलसिला


2001 में पंचायत चुनाव लड़कर माया राम नट पहली बार पंच बने थे। 2004 से लेकर हर विधानसभा, लोकसभा और जिला पंचायत के साथ जनपद का चुनाव लड़ते आ रहे हैं। 




एक बार अपनी बहू को भी जनपद पंचायत चुनाव में प्रत्याशी बना चुके हैं। इसमें बहू को जीत हासिल हुई थी। 2023 में पामगढ़ विधानसभा रिजर्व सीट से अपना नामांकन भरा था।


भूमिहीन हैं विजय  लक्ष्मी


विजय  लक्ष्मी ने बताया कि वे कच्चे मकान में रहते हैं। उनके पास पैसा नहीं है। कोई पुश्तैनी संपत्ति भी नहीं है। फिर भी वो लोकतंत्र के मंदिर में पहुंचने की उम्मीद से चुनावी मैदान में उतरते हैं। उनके सामने प्रत्याशी कोई भी रहे, कितना भी खर्च करे, माया राम गांव-गांव जाकर लोगों को डंगचगहा करतब दिखाकर अपना प्रचार करते है। लोगों से करतब दिखाने का इनाम भी लेते हैं।

ग्राम पंचायत महंत के रहने वाला हैं 


हर चुनाव में खर्च के लिए बेचते हैं सूअर


विजय  लक्ष्मी ने बताया कि, उनका सूअर पालन का व्यवसाय है। हर बार सूअर बेचकर नामांकन फॉर्म खरीदते हैं। उनके पास 100 से ज्यादा छोटे-बड़े सूअर हैं, जिसमें बड़े की कीमत 10 हजार रुपए तक मिल जाती है। छोटे सूअर तीन से पांच हजार रुपए में बिकते हैं।चुनाव का नामांकन पत्र दिखाती माया राम की बहू विजय लक्ष्मी।

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