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Saturday, August 3, 2024

आवासीय विद्यालय प्रवेश प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इतिहास रचता प्राथमिक शाला तिलकडीह

 आवासीय विद्यालय प्रवेश प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इतिहास रचता प्राथमिक शाला तिलकडीह






रतनपुर से ताहिर अली की रिपोर्ट


रतनपुर.....हम बात कर रहे हैं कोटा विकास खण्ड अंतर्गत सरकारी प्राथमिक शाला तिलकडीह का।आमतौर पर सुनने को मिलता है की सरकारी स्कूल के बच्चे पुस्तक भी नहीं पढ़ पाते यहां बच्चे हिंदी और अंग्रेजी के पुस्तक को फर्राटे से पढ़ लेते हैं यहां बच्चे परीक्षा में पास होने के साथ साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए पढ़ते है।2012 से पदस्थ शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने जहां आदिवासी बाहूल्य व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों  की शैक्षणिक स्तर पर कार्य करने व उन्हें नई दिशा दिखाने के लिए कमर कस ली है।शिक्षक बच्चों को केवल नौकरी के लिए ही नहीं तैयार कर रहे हैं बल्कि कौशल आधारित शिक्षा देकर शिक्षा का अलख जगा रहे हैं। स्कूल को पढ़ने का नहीं अपितु गढ़ने का केंद्र बिन्दु मानकर बच्चों का स्कील डेवलपमेंट प्रोग्राम तैयार कर क्रियान्वित कर रहे हैं।उन्होंने देखा किअधिकांश बच्चे पांचवी पास होने के बाद आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं व माता-पिता के साथ काम करने निकल जा रहे हैं,तब उन्होंने स्कूली शिक्षा को पूरी करवाने बच्चों की मानसिक योग्यता पर भी कार्य करना शुरू कर दिया।

विद्यालय को शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा व सहमति से 365 दिन संचालित कर रहे हैं, अवकाश के दिनों में भी एक घंटा बच्चों के लिए कार्य कर रहे हैं।उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं व विभागीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयारी करवाते हैं।बच्चों के माता-पिता को मानसिक रूप से इन प्रतियोगिताओं के लिए समझाना व सहमति बनाने में भी  समय-समय में परिवार से मिलकर बातचीत करते हैं।अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करना,तथा बच्चों की बौद्धिक स्तर के अनुरूप अलग-अलग प्रतियोगिता/प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए रणनीति तैयार करते हैं।

बच्चों को अपने घर में निशुल्क शिक्षण देते हुए माता-पिता की सहमति से घर में रखकर एकलव्य विद्यालय,जवाहर उत्कर्ष विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय,के लिए भगीरथ प्रयास करते हैं।व सफल भी हो रहें हैं।परिणाम यह रहा है कि प्रत्येक वर्ष बच्चे तिलकडीह स्कूल से चयनित होकर अपना सुनहरा भविष्य गढ़ रहे हैं,व विद्यालय व शिक्षक एक किर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

इस वर्ष भी कक्षा 5वीं का छात्र विहान पिता एकलव्य विद्यालय पेंड्रा के लिए सफल रहा है।2012 से अब तक लगातार 17 बच्चे एकलव्य,2 नवोदय, 2 बच्चे उत्कर्ष,1सैनिक विद्यालय के लिए चयनित होकर एक इतिहास रच रहे हैं।शिक्षक का कहना है कि बच्चों को प्रतियोगिता के लिए समय प्रबंधन,गति, बौद्धिक स्तर,व मानसिक रूप से तैयार करने के लिए  रणनीति बनाकर कार्य करना पड़ता है

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