ध्रुव गोंड आदिवासी समाज ने मनाया नवाखाई का पर्व।
गरियाबंद/ छुरा :- ग्राम डांगनबाय में धुव गोंड़ समाज ने नवाखाई का पर्व परंपरा अनुसार धूमधाम के साथ मनाया गया। सर्वप्रथम अपने देवी देवताओं का बड़ादेव दुलहा देव विशेष पूजा अर्चना कर बाजे गाजे के साथ खड़ा देव तलवार,भाला,बरछी, लेकर छत्रपति बड़ा देव की जय, प्रकृति देव की जय आदि पूर्वजों का जय घोष करते हुए शीतला मंदिर मैं जाकर विशेष पूजा अर्चना किया गया सजा वृक्ष पर पूजा अर्चना किया नई धान की बालियां ,नींबू ,नारियल ,ध्वज फूल सुपारी ,नव चावल का भोग बुढा़देव ,दूल्हा देव ,ठाकुर दिया एवं कुलदेवी तथा अपने पूर्वजों को अर्पित कर पूरे परिवार एक साथ नवाखाई का पर्व मनाया गया।नवाखाई पर्व में साजा पत्ता और नई धान का विशेष महत्व रहता है। तत्पश्चात घर में पूर्वजों के देवी देवताओं का विशेष सिंगार कर पुजा अर्चना किया नवाखाई पर्व के दिन साजा पत्ता एवं दोना बनाकर पूजा अर्चना किया गया।और नया प्रसाद साजा पत्ता में ही ग्रहण किया गया।उसके बाद घर के सभी छोटे-बड़े सदस्यों को नवा जोहर अर्थात प्रणाम करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया ।धुव गोंड़ समाज में नवाखाई का पर्व नवमी के दिन शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया।और उसका दूसरे दिन दसमी पर तिहार भी मनाया जायेगा ।
घर के आंगन में सभी परिवार बैठकर अपने बुढा़देव,ईष्ट देवी देवताओं,का पूजा करते हुए नए धान की बालियां चिवड़ चावल दूध नारियल ,रोट,और अन्य भोग अर्पित किया गया।तत्पश्चात परिवार के सभी सदस्यों के द्वारा एक साथ एक जगह बैठकर चिवड़ प्रसाद ग्रहण किया गया।परिवार रिस्तेदार जो दूर दराज में रहते है वह भी इस त्यौहार को मनाने अपने परिवार घर में आते हैं।यह परम्परा पूर्वजो से चली आ रहा है।और जिसे अब तक निभा रहे है।समूह भोजन के पश्चात बड़े बुजुर्ग के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया गया।
प्रमुख रूप से धनसिंह ध्रुव , रामशरण ध्रुव ,टिकेश्वर ध्रुव ,शीतल ध्रुव, सुरेंद्र ध्रुव , भूपेंद्र ,हीरालाल ध्रुव, भीखम ध्रुव ,राजेंद्र ध्रुव, नारद, कोमल, डोमेशवर लीलाधर तरुण ,हर्ष ,चंद्रहास,बिगेद्र कुमार,आयुष।


















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