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Wednesday, August 6, 2025

घंसौर सिविल सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं, तो निजी क्लीनिकों में क्यों न हो मनमानी

 जिला सिवनी मध्यप्रदेश

घंसौर सिविल सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं, तो निजी क्लीनिकों में क्यों न हो मनमानी




सी एन आई न्यूज सिवनी 

घंसौर, सिवनी: घंसौर में स्वास्थ्य व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति एक विचित्र विरोधाभास पैदा कर रही है। एक तरफ, 100 बिस्तरों वाले सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर के भरोसे पूरी आबादी की स्वास्थ्य ज़िम्मेदारी छोड़ दी गई है। दूसरी तरफ, निजी क्लीनिकों में मरीजों का तांता लगा हुआ है, जहाँ मनमाने शुल्क वसूले जाने की शिकायतें आम हैं। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या सरकार की अपनी ड्यूटी में लापरवाही ही निजी डॉक्टरों की मनमानी का कारण नहीं है?

कर्तव्य का टकराव: सरकारी और निजी डॉक्टर

सरकारी डॉक्टर: घंसौर के सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर की तैनाती है, जबकि नियमानुसार यहाँ कम से कम 10 से 15 डॉक्टरों की आवश्यकता है। यह स्थिति सरकारी डॉक्टरों पर अत्यधिक काम का बोझ डालती है, जिससे वे प्रभावी रूप से मरीजों की देखभाल नहीं कर पाते। हालांकि, उनकी प्राथमिकता सभी को समान और निःशुल्क उपचार देना है, लेकिन संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा।

निजी डॉक्टर: सरकारी लापरवाही का सीधा फायदा निजी डॉक्टर उठा रहे हैं। जब गरीब और ग्रामीण मरीजों को सरकारी अस्पताल से निराशा मिलती है, तो वे इन्हीं निजी क्लीनिकों का रुख करते हैं। यहाँ डॉक्टरों की योग्यता, उनके द्वारा दी जा रही सुविधाओं और दस्तावेजों की जाँच का कोई सख्त तंत्र नहीं है। ऐसे में, वे मनमाने ढंग से फीस वसूलते हैं और मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।

सेवा बनाम वसूली: किसका कर्तव्य क्या?

निजी डॉक्टर यह तर्क दे सकते हैं कि वे लोगों की सेवा कर रहे हैं, जो सरकारी अस्पताल नहीं कर पा रहा। लेकिन क्या यह सेवा तब भी कहलाएगी जब वे गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर अत्यधिक वसूली कर रहे हों? जबकि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह हर नागरिक को उचित स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करे। जब सरकार इस कर्तव्य से पीछे हटती है, तो निजी डॉक्टरों को 'भगवान' मानकर जनता उनके सामने झुकने पर मजबूर हो जाती है।

प्रशासन की निष्क्रियता: अपराधियों को संरक्षण?

प्रशासन इन दोनों स्थितियों पर मूकदर्शक बना हुआ है। एक ओर, सरकारी डॉक्टरों की कमी दूर नहीं की जा रही। दूसरी ओर, निजी क्लीनिकों की अनियमितताओं पर कोई जाँच या कार्रवाई नहीं हो रही। यह स्थिति सरकारी और निजी, दोनों ही क्षेत्रों में जवाबदेही की कमी को दर्शाती है। यह प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वह न सिर्फ सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि निजी क्षेत्र में कोई भी चिकित्सक जनता का शोषण न कर पाए।

यह विरोधाभास तब तक बना रहेगा जब तक शासन और प्रशासन दोनों अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेंगे। घंसौर में स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल सिर्फ एक चिकित्सकीय समस्या नहीं है, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक असफलता है।

जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट

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