सी एन आई न्यूज़ रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा
हादसे में घायल होने के बाद भी बुलंद हौसला, छात्र जीवन में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित
पिथौरा _जिले के विशेष आरक्षक एवं साइबर क्राइम जागरूकता अभियान से जुड़े श्री मनोज डड़सेना हाल ही में एक सड़क हादसे में घायल हो गए, लेकिन उनका हौसला और देश सेवा का जज़्बा आज भी अडिग है।
बुजुर्ग को बचाने में घायल
घटना उस समय हुई जब वे एक व्यक्ति के रेस्क्यू के लिए जा रहे थे। रास्ते में अचानक एक बुजुर्ग सामने आ गए। बुजुर्ग को बचाने के प्रयास में श्री डड़सेना ने अपनी मोटरसाइकिल को मोड़ा और ब्रेक लगाए, जिससे वे अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर पड़े।
इस हादसे में उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं और बायें हाथ में गंभीर चोट पहुँची। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अकालपूरक अस्पताल, महासमुंद पहुँचाया, जहाँ चिकित्सकों की देखरेख में उनका हाथ का ऑपरेशन सफलता पूर्वक हुआ।
जनता और पुलिस का मिला साथ
सूचना मिलते ही उनके परिजन, रिश्तेदार, मित्रगण, स्कूल-कॉलेज के छात्र-शिक्षक तथा पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अस्पताल पहुँचे और उनका हालचाल जाना।
सभी ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
भावुक बयान
स्वास्थ्य लाभ के बीच श्री डड़सेना ने कहा—
> “जनता मेरा परिवार है और छत्तीसगढ़ पुलिस मेरा ब्लड है। देश सेवा कभी नहीं रुकेगी। तकलीफ़ और समय विपरीत है, लेकिन सब ठीक हो जाएगा। पद पर रहूँगा तब भी सेवा करूंगा, पद पर न रहूँगा तब भी सेवा करूंगा। जनता का प्यार, स्नेह और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है। जय हिंद, प्रणाम सभी जनता को।”
छात्र जीवन और सम्मान
मनोज डड़सेना छात्र जीवन से ही अनुशासित और कर्मठ रहे हैं। उन्हें उनकी प्रतिभा और सेवाभाव के लिए राज्यपाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
खानपान और जीवनशैली
वे शुद्ध शाकाहारी हैं और किसी भी प्रकार का नशा नहीं करते।
उनके भोजन में दाल, चावल, रोटी और हरी सब्ज़ियाँ प्रमुख हैं।
वे पशु-पक्षियों को अपना मित्र मानते हैं और उनके प्रति विशेष करुणा रखते हैं।
विचार और दर्शन
श्री डड़सेना मानते हैं कि—
> “पदोन्नति और वेतन जीवन का हिस्सा है, लेकिन देश सेवा की भावना और जोश जब तक जान है तब तक चलता रहेगा। बाधाएँ हमें परखने के लिए आती हैं।”
वे मेहनत और ईमानदारी से कमाई को ही पसंद करते हैं।
नकारात्मकता और दबाव से दूर रहते हैं।
युवाओं के लिए संदेश
परिवार और दोस्तों के सहयोग से वे सदैव सही का साथ देने वाले बने हैं। वे युवाओं को संदेश देते हैं—
> “कर्म करो, फल की चिंता मत करो। ईमानदारी का रास्ता कठिन है लेकिन अंत में सुकून देता है।”



















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