नवरात्र विशेष
पंचम स्वरूप स्कंदमाता नवरात्रि के पांचवे दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा ।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी। स्कंदमाता प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं की सेनापति बनी थीं जिस वजह से पुराणों में कुमार और श क्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है।
नवरात्रि के पांचवे दिन दुर्गा मां के स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं देवी हैं स्कंदमाता। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। वहीं, मान्यता ये भी है कि इनकी पूजा करने से संतान योग की प्राप्ति होती है ।
स्कंदमाता की पूजा से व्यक्ति को ज्ञान और चेतना की प्राप्ति होती है, जिससे मूढ़ व् इनकी उपासना से भक्त को मोक्ष प्राप्त होता है और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
पद्मासन पर विराजमान: स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है।


















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