ओंकारेश्वर (मध्यप्रदेश)में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी
डॉ.पीसी लाल यादव का हुआ व्याख्यान व सम्मान
गंडई पंडरिया / खैरागढ़ - मध्यप्रदेश शासन संस्कृति परिषद , जनजातीय बोली विकास एवम् कला अकादमी भोपाल द्वारा 15 से 17 नवंबर तक ओंकारेश्वर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय था "वंशावली और विरुदावलियां", जिसमे देश भर के 60 से अधिक विद्वान अध्येताओं ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि थे अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण एवम् संवर्धन समिति के संरक्षक रामप्रसाद जी।अध्यक्षता की हिमाचल केंद्रीय विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने।अतिथियों के स्वागत उपरांत अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे जी ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया सुप्रसिद्ध विचारक आशुतोष जी ने।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में गंडई के साहित्यकार व संस्कृति कर्मी डॉ.पीसी लाल यादव ने विरुदावली गायक चारण, हरबोले व वंशावलियों के संधारक भाट पर अपना शोधपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा की वंशावली भारतीय समाज का मौखिक इतिहास है। जिसका भाट नहीं उसकी जात नहीं। डॉ.यादव ने यदुवंश व निषाद जाति के भाटों का उल्लेख करने के साथ ही गंडई के पूर्व जमींदार स्व.लाल डोगेंद्र शाह खुसरो की वंशावली,उनका इतिहास और उनकी दानशीलता का बखान राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया। चिर परिचित अंदाज में उनके द्वारा पी पी टी के माध्यम से प्रस्तुत शोध पत्र की सराहना सभी विद्वानों ने तालियों की गड़गड़ाहट से की।
तृतीय दिवस के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ.यादव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शोधकर्ताओं और अध्येताओं को विषय के प्रति और अधिक गंभीर होने का आह्वान किया। संगोष्ठी का गौरवमयी समापन प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे.नंदकुमार जी के मुख्य आथित्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर निदेशक डॉ.धर्मेंद्र पारे जी ने डॉ.पीसी लाल यादव को प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।




















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