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Wednesday, January 7, 2026

बी.एस.सी. की फर्जी अंकसूची मामला : जांच दबाने के आरोपों में घिरे जिला शिक्षा अधिकारी, दस्तावेज गायब होने से संदेह गहराया

 बी.एस.सी. की फर्जी अंकसूची मामला : जांच दबाने के आरोपों में घिरे जिला शिक्षा अधिकारी, दस्तावेज गायब होने से संदेह गहराया



बिलाईगढ़।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर–चांपा जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दलदली, विकासखंड कसडोल (जिला बलौदाबाजार–भाटापारा) में पदस्थ शिक्षक श्री चंदराम यादव पर फर्जी बी.एस.सी. अंकसूची के आधार पर नौकरी करने के आरोपों के बावजूद जांच को जानबूझकर अधूरा रखे जाने का मामला सामने आया है।




 इस पूरे प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी, जांजगीर–चांपा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर द्वारा पत्र क्रमांक 3701 दिनांक 10/09/2025 एवं पत्र क्रमांक 5185 दिनांक 04/11/2025 के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे नियुक्ति आदेश, चयन सूची, पूर्व जांच प्रतिवेदन एवं भर्ती के समय प्रस्तुत बी.एस.सी. की सत्यापित अंकसूची अनिवार्य रूप से प्रेषित करें।




बार-बार पत्राचार, फिर भी अंकसूची नदारद


सूत्रों के मुताबिक, कई बार स्मरण पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक बी.एस.सी. की सत्यापित अंकसूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। दस्तावेजों के अभाव में जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। 




सवाल यह उठ रहा है कि यदि अंकसूची वैध और सही है, तो उसे प्रस्तुत करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है?

मीडिया के सवालों पर भी चुप्पी


हमारे संवाददाता द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से फोन पर कई बार संपर्क कर जानकारी चाही गई। अधिकारी द्वारा “डॉक्यूमेंट व्हाट्सएप पर भेज दो, देख लूंगा” कहने के बाद भी, आवश्यक जानकारी भेजे जाने के बावजूद कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इस मौन ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

आदेशों की अवहेलना या संरक्षण?



शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि यह रवैया न केवल उच्च अधिकारियों के आदेशों की खुली अवहेलना है, बल्कि इस बात की आशंका भी पैदा करता है कि कहीं आरोपी शिक्षक को प्रशासनिक संरक्षण तो नहीं दिया जा रहा।


भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं


दस्तावेजों को रोके रखने से जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका संदिग्ध होती जा रही है। मामले में संलिप्तता एवं भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। 




यह प्रकरण केवल एक शिक्षक की नियुक्ति का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।


जांच अधर में, कार्रवाई ठप


बी.एस.सी. अंकसूची के अभाव में जांच पूरी तरह अटकी हुई है। इससे शासन की साख प्रभावित हो रही है और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय की स्थिति बन रही है।



उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज


मामले को लेकर यह मांग जोर पकड़ रही है कि प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। 




दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कठोर वैधानिक कार्रवाई हो। साथ ही, मामले को सतर्कता विभाग/ईओडब्ल्यू को सौंपने की मांग भी उठ रही है।

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