RTI कानून की खुलेआम धज्जियाँ : नगर पंचायत बिलाईगढ़ में आदेश के 6 माह बाद भी सूचना गायब
बिलाईगढ़ | नगर पंचायत बिलाईगढ़ में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 को कागज़ी कानून बनाकर रख दिया गया है। प्रथम अपील अधिकारी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 16 जून 2025 को पारित स्पष्ट आदेश के बावजूद 6 माह से अधिक समय बीत जाने पर भी जन सूचना अधिकारी ने एक भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई,
जिससे प्रशासनिक तानाशाही और जवाबदेही से भागने की मंशा उजागर हो गई है।
कार्यालयीन जावक क्रमांक 397/सू.अ./प्रथम अपील/2025/बिलाईगढ़ के तहत जारी आदेश की कंडिका क्रमांक 4 में साफ कहा गया था
कि मांगी गई जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम की किसी भी छूट श्रेणी में नहीं आती तथा 15 कार्य दिवसों के भीतर जानकारी देना अनिवार्य है। बावजूद इसके आदेश को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
आरटीआई आवेदक अरुण ग्रेवाल (वार्ड क्रमांक 10) ने बताया कि उन्होंने प्लेसमेंट कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया, प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृत क्षेत्रफल, तथा संपत्ति कर निर्धारण दरों जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ मांगी थीं, जिनका सीधा संबंध जनहित और वित्तीय पारदर्शिता से है।
जानकारी न देना यह दर्शाता है कि नगर पंचायत प्रशासन सच को दबाने और अनियमितताओं पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है। आदेश की अवहेलना कर जन सूचना अधिकारी ने न सिर्फ सूचना आयोग की शक्तियों को चुनौती दी है, बल्कि RTI कानून की आत्मा पर भी सीधा हमला किया है।
आवेदक ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो मामला राज्य सूचना आयोग के साथ-साथ दंडात्मक कार्यवाही की मांग तक जाएगा। वहीं स्थानीय नागरिकों में रोष है और सवाल उठ रहे हैं कि जब आदेश के बाद भी सूचना नहीं मिलती तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करे?




















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